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बालोद में युक्तियुक्तकरण बना विवाद का केंद्र, शिक्षक बोले अन्याय – प्रशासन बोला प्रक्रिया में पूरा पारदर्शीता”

युक्तियुक्तिकरण को लेकर बालोद में शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन, प्रशासन ने पारदर्शी के साथ प्रक्रिया का दिया भरोसा

बालोद,।जिले में युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। शिक्षक साझा मंच के नेतृत्व में जिले भर के शिक्षकों ने जिला पंचायत कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन पर मनमाने ढंग से शिक्षकों का समायोजन करने का आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर प्रशासन का दावा है कि पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई।

शिक्षकों ने लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया न केवल भ्रामक है, बल्कि यह शिक्षकों के साथ अन्याय भी कर रही है। उनका आरोप है कि बिना ज़मीनी सत्यापन और वास्तविक आवश्यकता को समझे शिक्षकों को जबरन स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे उनकी पारिवारिक और मानसिक स्थिति पर विपरीत असर पड़ रहा है। साथ ही, इससे स्कूलों की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही है।

शिक्षक साझा मंच के जिला संचालक जितेंद्र शर्मा ने कहा, “प्रशासन ने न तो आपत्तियाँ लीं, न ही सूची की गंभीर त्रुटियों को सुधारा। काउंसलिंग में प्राथमिकता क्रम का पालन नहीं किया गया और परिवीक्षाधीन शिक्षकों, दिव्यांगों को भी सूची में शामिल कर दिया गया। यह राज्य शासन के निर्देशों के खिलाफ है।”

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने चार सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार, काउंसलिंग में पारदर्शिता, गलत ढंग से अतिशेष घोषित शिक्षकों की पुनर्बहाली और सरकारी स्कूलों को कमजोर करने वाली नीतियों पर रोक शामिल हैं।

प्रशासन का पक्ष: शांतिपूर्ण और पारदर्शी रही काउंसलिंग

वहीं, जिला प्रशासन ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया कि युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया राज्य शासन के निर्देशानुसार पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, जिला पंचायत प्रभारी सीईओ श्री चंद्रकांत कौशिक, अपर कलेक्टर श्री अजय किशोर लकरा और जिला शिक्षा अधिकारी डीपी कोसरे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में काउंसलिंग कराई गई।

प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी डीपी कोसरे ने बताया कि 2 जून को व्याख्याता ई एवं टी संवर्ग के शिक्षकों सहित प्रधान पाठकों और उच्च वर्ग शिक्षकों की काउंसलिंग कर उन्हें आदेश पत्र सौंपा गया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में प्रोजेक्टर और सूचना पटल के माध्यम से रिक्त शालाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न हो।

संपर्क का प्रयास, लेकिन वार्ता अधूरी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कलेक्टर से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपर कलेक्टर से वार्ता करने के लिए कहा गया। प्रतिनिधिमंडल ने अतिशेष शिक्षकों की सूची में पाई गई गंभीर त्रुटियों से प्रशासन को अवगत कराया और काउंसलिंग निरस्त करने की मांग की। अपर कलेक्टर ने इसे कलेक्टर के समक्ष रखने का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी शिक्षक यह कहकर नाराज़ दिखे कि उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

आपको बतादे एक ओर शिक्षक समुदाय युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण और त्रुटिपूर्ण बता रहा है, वहीं प्रशासन इसे नियमानुसार और पारदर्शी बता रहा है। फिलहाल यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। आगे देखना होगा कि शासन-प्रशासन शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है। 

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