बालोद। जिले में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। यातायात पुलिस की उदासीनता और आम लोगों में जागरूकता की कमी के चलते सड़क हादसों पर लगाम नहीं लग पा रही है। जनवरी से मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, बालोद जिले में कुल 225 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 115 लोगों की मौत हो चुकी है और 264 से अधिक लोग घायल हुए हैं। औसतन प्रतिदिन एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार हो रहा है।
तेज रफ्तार, नशा और लापरवाही बनी मुख्य वजह
जिले की सड़कों पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य कारण तेज रफ्तार, शराब का सेवन कर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना है। यातायात विभाग के अनुसार, अधिकांश मौतें सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हुई हैं, जो बिना हेलमेट के वाहन चलाने से होती हैं। इसके अतिरिक्त, शराब के नशे में गाड़ी चलाने की प्रवृत्ति भी जानलेवा साबित हो रही है।
सड़क सुरक्षा सप्ताह बनकर रह गया औपचारिकता
प्रशासन द्वारा वर्ष में एक बार सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जाता है, जिसमें वाहन चालकों को नियमों की जानकारी दी जाती है। इसमें तेज रफ्तार से बचने, शराब पीकर गाड़ी न चलाने, हेलमेट पहनने जैसे संदेश शामिल होते हैं। परंतु व्यवहार में इसका असर नगण्य रहा है। जागरूकता की कमी और वाहन चालकों की लापरवाही दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बनी हुई है।
एसपी ने दिए थे कड़े निर्देश, फिर भी हालात जस के तस
सड़क हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने संबंधित विभागों की एक बैठक आयोजित की थी। इसमें लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, परिवहन विभाग के अधिकारियों को विगत वर्षों की दुर्घटनाओं के आधार पर ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित कर वहाँ सुरक्षात्मक उपाय जैसे रंबल स्ट्रिप, संकेतक बोर्ड, कैट्स आई, प्रकाश व्यवस्था, ट्रैफिक सिग्नल और ब्लीकर लगाने के निर्देश दिए गए थे।
साथ ही, पुलिस और परिवहन विभाग को दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों में सघन चालानी कार्रवाई, नो-पार्किंग क्षेत्रों में खड़े वाहनों की सख्त जांच, बिना हेलमेट, तीन सवारी और मालवाहक वाहनों में यात्रियों की ढुलाई करने वालों पर कठोर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। आम जनता को यातायात नियमों के पालन हेतु जागरूक करने की बात भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।
जागरूकता और सख्ती ही बनेगी समाधान
जिले में सड़क दुर्घटनाओं की लगातार बढ़ती संख्या प्रशासन, पुलिस और आम जनता के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जब तक यातायात नियमों का सख्ती से पालन नहीं होगा और जागरूकता को व्यवहार में नहीं लाया जाएगा, तब तक हादसों पर रोक लगा पाना मुश्किल है।




















