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बालोद में फूटा शिक्षक आक्रोश: युक्तियुक्तकरण के खिलाफ कल होगा ज़बरदस्त आंदोलन

बालोद, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू किए जा रहे युक्तियुक्तकरण की नीति के खिलाफ बालोद जिले में शिक्षकों का गुस्सा उबाल पर है। सैकड़ों शिक्षकों ने रविवार को सरदार पटेल मैदान, बालोद में एकत्र होकर स्पष्ट ऐलान कर दिया — “कल काउंसलिंग का पूर्णतः बहिष्कार किया जाएगा!”

जहां एक ओर शासन ने 4 जून तक जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का आरोप है कि आज तक न तो अतिशेष शिक्षकों की स्पष्ट सूची जारी हुई है और न ही रिक्त पदों की कोई जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

“यह नीतिगत अन्याय है” — देवेन्द्र हरमुख

जिला संचालक देवेन्द्र हरमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “यह युक्तियुक्तकरण नहीं, शिक्षकों की संख्या में कटौती है। सरकार दो शिक्षकों से पाँच कक्षाएँ पढ़वाना चाहती है। यह शिक्षा व्यवस्था के साथ क्रूर मज़ाक है।” उन्होंने बताया कि सरकार की योजना के अनुसार हर प्राथमिक शाला से एक शिक्षक पद कम किया जा रहा है, जिससे अधिकांश स्कूल दो शिक्षक तक सीमित रह जाएंगे। बालवाड़ी को भी प्राथमिक शाला में जोड़ने के बावजूद अलग शिक्षक का प्रावधान नहीं किया गया है।

संकुल समन्वयकों ने भी मोर्चा संभाला

इस आंदोलन में संकुल समन्वयक संघ ने भी निर्णायक हस्तक्षेप किया है। संकुल समन्वयक अध्यक्ष संदीप दुबे ने घोषणा की: “हम युक्तियुक्तकरण की इस अव्यवहारिक नीति का विरोध करते हैं। शासन के किसी भी आदेश का संप्रेषण हम नहीं करेंगे।

सभी पांचों विकासखंडों के संकुल समन्वयकों ने यह प्रस्ताव पारित किया कि वे शिक्षक विरोधी इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएंगे।

कल आंदोलन होगा निर्णायक मोड़ पर

कल, 2 जून को जब युक्तियुक्तकरण काउंसलिंग का पहला दिन तय किया गया है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक समुदाय सड़क पर उतर कर इसका बहिष्कार करेगा।
प्रशासन के लिए यह परीक्षा की घड़ी होगी — एक तरफ फाइलों की प्रक्रिया, दूसरी ओर ज़मीन पर उबलता असंतोष।

प्रशासन मौन, शिक्षक मुखर

आश्चर्यजनक रूप से अब तक प्रशासन ने न तो शिक्षक संगठनों की आपत्तियों का कोई समाधान प्रस्तुत किया है, न ही संवाद की कोई प्रक्रिया अपनाई है। इससे यह संघर्ष अब सिर्फ नीतिगत असहमति नहीं, बल्कि “गौरवशाली शिक्षक समुदाय की प्रतिष्ठा की लड़ाई” बन चुकी है।

विरोध के अग्रदूत: शिक्षकों की एकजुटता

आज के विरोध प्रदर्शन में कई वरिष्ठ शिक्षक नेता मौजूद रहे, जिनमें देवेन्द्र हरमुख, रामकिशोर खरांशु, संदीप दुबे, एलेन्द्र यादव, अश्वनी सिन्हा, उमेश साहू, धनमत साहू, वीणा ठाकुर, शिव कुमार शांडिल्य, फलेश देवांगन, तोमन भुआर्य सहित दर्जनों शिक्षकों ने भाग लिया और कल के आंदोलन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।

प्रदेशरुचि की भूमिका

गौरतलब है कि प्रदेशरुचि ने पिछले सप्ताह युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया की खामियों पर विस्तार से रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसका व्यापक असर देखा गया। उसी के बाद प्रशासन ने आनन फानन अतिशेष शिक्षकों की अधूरी सूची जारी की, लेकिन रिक्त पदों की जानकारी अब भी नहीं दी गई है। यही आक्रोश का मुख्य कारण बन गया है।

कल बालोद जिले में कोई सामान्य दिन नहीं होगा। युक्तियुक्तकरण की आड़ में घटती शिक्षक संख्या, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और शिक्षकों की अनदेखी के खिलाफ एकजुट शिक्षक “शिक्षा बचाओ – शिक्षक बचाओ” के नारे के साथ सड़कों पर होंगे।

आज उपस्थित रहे प्रमुख शिक्षक नेता

इस विरोध प्रदर्शन में शिक्षक संगठन, साझा मंच, संकुल समन्वयक संघ सहित कई संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे। प्रमुख नामों में देवेंद्र हरमुख, रामकिशोर खरांशु, एलेन्द्र यादव, अश्विनी सिन्हा, संदीप दुबे, खिलानंद साहू, छबिलाल साहू, अनिल दिल्लीवार, उमेश साहू, धनमत साहू,  विमला रानी गंगबेर, तोमन नागवंशी, शिव कुमार शांडिल्य सहित दर्जनों शिक्षक प्रतिनिधि शामिल रहे।

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