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300 साल बाद भी जिंदा हैं अहिल्याबाई के विचार, बालोद की गोष्ठी में दिखा असर

लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर बालोद में विचार संगोष्ठी, चेमन देशमुख और यशवंत जैन के विचारों ने बांधा समां

बालोद।300 साल पहले जिसने समाज सुधार और सुशासन की इबारत लिखी, उस लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को याद करने आज बालोद साक्षी बना एक प्रेरणादायी आयोजन का। कला केंद्र बालोद में राष्ट्रीय स्वाभिमान विचार मंच के बैनर तले हुई संगोष्ठी में सैकड़ों लोग जुटे और वक्ताओं ने अहिल्याबाई के जीवन संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

इतिहास ने भुलाया, अब देश याद कर रहा” – यशवंत जैन 

मुख्य वक्ता यशवंत जैन ने मंच संभालते ही कहा—”कम उम्र में विवाह और फिर विधवा होने के बाद भी अहिल्याबाई ने न केवल अपने राज्य को संभाला, बल्कि देशभर के लिए सुशासन, न्याय और धर्म की मिसाल बन गईं।”
जैन ने बताया कि अहिल्याबाई के प्रशासनिक निर्णय इतने न्यायप्रिय होते थे कि बड़े-बड़े राजाओं ने उनसे सलाह ली। जल संरक्षण के लिए कुएं, बावड़ियां, तालाब और शिवालयों का निर्माण हो या किसान हित में लगान से राज्य विकास—उनका हर कदम लोककल्याण के लिए था।
उन्होंने इतिहासकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा, “वामपंथी सोच ने अहिल्याबाई जैसे युगनायकों को इतिहास से मिटाने की कोशिश की, लेकिन अब पूरा देश उनके योगदान को सम्मान दे रहा है।”

बालोद बना विचार क्रांति का मंच, चेमन देशमुख ने कहा — अहिल्याबाई आज भी मार्गदर्शक हैं

भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि “राजमाता अहिल्याबाई का विज़न तीन शताब्दियों पहले का होकर भी आज की नीतियों से कहीं आगे का है। बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और समाज सुधार जैसे विषयों पर उन्होंने जो कदम उठाए, वो आज भी नीति-निर्माताओं को दिशा दे रहे हैं।”

देशमुख ने खासतौर पर उस प्रसंग का ज़िक्र किया जब मछलियों के गर्भाधान काल में मिट्टी के दीये के स्थान पर आटे का दीपदान किया जाता था, ताकि जीवहत्या न हो। इसी तरह बीजों को आटे की गोलियों में भरकर नदियों में प्रवाहित करने की परंपरा का ज़िक्र कर उन्होंने कहा, “अहिल्याबाई न केवल धर्मनिष्ठ थीं, बल्कि पर्यावरण और विज्ञानसम्मत सोच की प्रतीक थीं।”

कार्यक्रम की प्रस्तावना में जिला संयोजक पवन साहू ने बताया कि बीते पखवाड़े से जिले भर में संगोष्ठियां, प्रदर्शनी, रक्तदान शिविर और जागरूकता अभियान आयोजित किए गए। उनका उद्देश्य अहिल्याबाई के विचारों को जनमानस तक पहुंचाना था।

मंच पर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, जनपद अध्यक्ष सरस्वती टेमरिया, सफाई कर्मी प्रमुख शबनम सहित अनेक जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मौजूद रहे।

संगोष्ठी में चेमन देशमुख, यशवंत जैन, पवन साहू, वीरेंद्र साहू, यज्ञदत्त शर्मा, राकेश यादव, टीनेश्वर बघेल, अरुण साहू, विवेक वैष्णव, संगीता टुवानी, ज्योति राठी, ममता तिवारी, अजय साहू, डेनमाल जैन, डॉक्टर छावड़ा, राजू पटेल, बृजेश गुप्ता, गंगाधर सोनबरसा, तोमरलाल सोनवानी, गोमती रात्रि, सुनीता मनहर, प्राची लालवानी, संतोष कौशिक, रवि पांडे,नरेंद्र सोनवानी, मनीष गांधी, विनोद जैन, सहित जिले भर से बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम समापन के साथ यह संदेश स्पष्ट था कि राजमाता अहिल्याबाई होलकर सिर्फ इतिहास की चरित्र नहीं, बल्कि आज के भारत की चेतना हैं।

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