
बालोद के तांदुला रिसॉर्ट में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में जिले के पांचों विकासखंडों से आए 22 स्व सहायता समूहों की 40 महिलाओं ने भाग लिया। राज्यपाल ने एक-एक समूह से संवाद कर मछली पालन, बकरी पालन, हस्तशिल्प, ड्रोन तकनीक से खेती, मशरूम उत्पादन और सेनिटरी पैड निर्माण जैसे विविध कार्यों की जानकारी ली।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि महिलाएं सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं, सामाजिक रूप से भी सक्रिय हैं। उन्होंने जल जतन अभियान में अपनी भागीदारी बताते हुए जल संरक्षण और वैकल्पिक खेती के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने की पहल की जानकारी दी।

राज्यपाल ने विशेष रूप से राष्ट्रीय आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और अब अपने परिवारों को बेहतर भविष्य दे पा रही हैं।
इस अवसर पर बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की सक्रिय नेतृत्व क्षमता एक बार फिर नजर आई। पूरे आयोजन में कलेक्टर की भूमिका न केवल प्रभावी रही, बल्कि जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता भी झलकी। राज्यपाल ने भी जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल की टीम के प्रयासों की सराहना की।

मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ में चल रही केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति को सराहा और बताया कि वे स्वयं जिलों में जाकर जमीनी हकीकत का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने बालोद को एक मॉडल जिला बताते हुए कहा कि यहां प्रशासनिक कार्यशैली अनुकरणीय है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि नक्सल समस्या अब खत्म होने की ओर है, जिससे विकास की रफ्तार और तेज होगी।




















