इस अवसर पर पांडेय ने केंद्र की उत्पादन प्रक्रिया, क्षमता तथा श्रमिकों की कार्यस्थिति का गहन निरीक्षण किया और महिला कत्तिनों एवं बुनकरों से सीधा संवाद स्थापित किया। वर्तमान में इस केंद्र में 129 महिला कत्तिनें और 11 बुनकर खादी निर्माण कार्य में संलग्न हैं, जो ग्रामीण स्वावलंबन का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है।

‘वोकल फॉर लोकल’ का स्थानीय धरातल पर क्रियान्वयन
अध्यक्ष पांडेय ने अपने संबोधन में कहा, “देवरबीजा खादी उत्पादन केंद्र माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प का प्रत्यक्ष प्रतीक है। साथ ही यह माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।” उन्होंने खादी को सिर्फ वस्त्र नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, स्वाभिमान और स्वावलंबन का प्रतीक बताया।
तकनीकी उन्नयन और नवाचार को मिलेगी प्राथमिकता
पांडेय ने यह भी आश्वासन दिया कि खादी बोर्ड द्वारा इस केंद्र को भविष्य में तकनीकी उन्नयन, डिज़ाइन नवाचार, प्रशिक्षण और विपणन की दिशा में हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कर्मियों से गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
व्यापक जनभागीदारी
इस कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, खादी बोर्ड के अधिकारी एवं क्षेत्रीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। महिला कर्मियों और बुनकरों ने अपने अनुभव साझा किए और शासन की योजनाओं के प्रति आभार जताया।
पारंपरिक उद्योगों को मिलेगा नया जीवन
समापन में पांडेय ने कहा: “छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्यरत है। देवरबीजा उत्पादन केंद्र इस संकल्प का ज्वलंत उदाहरण है।”




















