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सेवा और संवेदना का संगम: ‘अपना घर’ और ‘घरौंदा’ में दिखा प्रशासन का सजीव रूप”

बालोद कलेक्टर की संवेदनशील पहल – वृद्धों और दिव्यांग बच्चों के साथ बिताए आत्मीय पल“अपना घर” वृद्धाश्रम एवं “घरौंदा” आश्रय गृह का निरीक्षण कर व्यवस्था देखीं, बाँटा स्नेह और सामग्री

बालोद,जिले की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने मानवता और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश करते हुए “अपना घर” वृद्धाश्रम और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए बने “घरौंदा” आश्रय गृह का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण करते हुए वहाँ निवासरत बुजुर्गों और बच्चों से आत्मीय संवाद किया और उन्हें फल, बिस्किट सहित खाद्य सामग्री भी वितरित की।

कलेक्टर का मधुर, अपनापन भरा व्यवहार देख बुजुर्गों की आँखें नम हो उठीं तो बच्चे भी मुस्कुराते हुए उनके साथ घुल-मिल गए। खासकर बुजुर्ग श्रीमती सपना भद्रा कलेक्टर से बातचीत के दौरान भावुक हो गईं, जिनकी आँखों में स्नेह और सम्मान छलक उठा।

वृद्धों की चिंता, बच्चों का हौसला

श्रीमती मिश्रा ने “अपना घर” में वृद्धजनों के रहने, खाने, इलाज, मनोरंजन तथा साफ-सफाई से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वृद्धजनों के लिए फिजियोथेरेपी की सुविधा सुनिश्चित करने और परिसर में पौधरोपण करने के भी निर्देश दिए।

वहीं “घरौंदा” आश्रय गृह में मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने उनके शिक्षण, रुचियों और रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी ली। बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स और कलाकृतियों को देखकर कलेक्टर ने खूब सराहना की और उन्हें लगातार सीखते रहने की प्रेरणा दी।

संवेदनशील प्रशासन की मजबूत झलक

इस पूरे दौरे में कलेक्टर मिश्रा ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल योजनाएँ बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदना और सेवा पहुँचाने का जरिया भी है।

इस अवसर पर अपर कलेक्टर नूतन कंवर, उप संचालक समाज कल्याण अजय गेडाम सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

कलेक्टर की यह संवेदनशील पहल समाज में प्रशासन के मानवीय चेहरे को और मजबूत करती है, जो न केवल सराहनीय है, बल्कि प्रेरणास्पद भी।

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