बालोद, छत्तीसगढ़ – गुंडरदेही उपपंजीयन कार्यालय में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान रामकुमार साहू ने कीटनाशक पीने का प्रयास किया। किसान का दावा था कि अपनी बहन के आधार कार्ड में नाम की गड़बड़ी के कारण वह एक साल से पैतृक ज़मीन की रजिस्ट्री नहीं करवा पा रहे थे। हालांकि, बाद में जिला प्रशासन ने इस घटना को भ्रामक बताते हुए कहा कि किसान ने जानबूझकर ‘हक त्याग’ निष्पादन के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया।
क्या हुआ था बुधवार को?
ग्राम भुसरेंगा निवासी किसान रामकुमार साहू उपपंजीयन कार्यालय पहुंचे और कार्यालय के भीतर ही अपने पास मौजूद कीटनाशक की शीशी दिखाकर आत्महत्या की धमकी देने लगे। यह पूरी घटना उनके पुत्र द्वारा मोबाइल पर रिकॉर्ड की गई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। मौके पर मौजूद कर्मियों और लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें रोक लिया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुंडरदेही ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति सामान्य बताते हुए प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी।
किसान का पक्ष
रामकुमार साहू का कहना है कि वे अपनी बहन के साथ ज़मीन की रजिस्ट्री करवाना चाहते थे, लेकिन आधार कार्ड में बहन का नाम ‘लक्ष्मी’ होने के कारण दिक्कतें आ रही थीं, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में उनका नाम ‘रेवती’ दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे कई महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।
प्रशासन का जवाब: ‘कोई आवेदन नहीं दिया गया था’
बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने मीडिया में प्रसारित खबरों को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच कराई। प्रशासन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:
किसान रामकुमार ने उपपंजीयन कार्यालय में किसी भी प्रकार का विधिवत आवेदन प्रस्तुत नहीं किया था।
राजस्व अभिलेख में उनकी बहन का मूल नाम रेवती पिता सियाराम दर्ज है, जो कि सही है। खुद रामकुमार ने पहले यह स्वीकार किया था कि शादी के बाद उनकी बहन का नाम आधार कार्ड में ‘लक्ष्मी’ दर्ज किया गया है।
मामले में पहले फौती और बंटवारे का आदेश विधिवत जारी हो चुका था, जिसमें नाम ‘रेवती’ ही दर्ज किया गया था।
मेडिकल जांच में पाया गया कि किसान ने कीटनाशक का सेवन नहीं किया था, केवल धमकी दी गई थी।
नामों की विसंगति बनी बाधा
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी दस्तावेज़ों, खासकर आधार कार्ड और राजस्व रिकॉर्ड के नामों में अंतर के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानी को उजागर किया है। किसान संगठनों ने इस पर चिंता जताते हुए पारदर्शी और संवेदनशील प्रक्रिया की मांग की है।
क्या कहता है कानून?
भूमि की रजिस्ट्री प्रक्रिया में सभी दस्तावेजों का मिलान अनिवार्य होता है। अगर किसी दस्तावेज में नाम में अंतर हो — जैसे आधार कार्ड और राजस्व रिकॉर्ड में — तो रजिस्ट्री प्रक्रिया तब तक रोकी जा सकती है, जब तक संबंधित व्यक्ति विधिवत रूप से नाम परिवर्तन या प्रमाण प्रस्तुत न करे।
किसान द्वारा की गई आत्महत्या की धमकी ने प्रशासनिक प्रक्रिया और दस्तावेजों की जटिलताओं पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि प्रशासन ने इसे दबाव बनाने की ‘योजना’ बताते हुए स्थिति को नियंत्रण में बताया है, पर यह स्पष्ट है कि ज़मीनी स्तर पर दस्तावेजी असमानता आज भी आम नागरिकों के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है।




















