बैठक में मुख्य बातें:
योजनाओं की हकीकत जानने फील्ड में निकलें अफसर: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे फील्ड विजिट को प्राथमिकता दें। “कागजों से बाहर निकलकर गांवों में दिखना होगा,” उन्होंने कहा।
फसल चक्र में बदलाव जरूरी: पानी के संकट पर चिंता जताते हुए धान पर निर्भरता कम करने और गन्ना, दलहन-तिलहन फसलों को बढ़ावा देने की बात कही।
स्वच्छता पर खास जोर: स्वच्छ भारत मिशन का असर तो दिखा है, लेकिन सफाई से जुड़ी शिकायतों का फौरन समाधान जरूरी है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा – “सफाई सिर्फ अभियान नहीं, आदत बने।”

राजस्व मामलों में देरी पर नाराज़गी: बार-बार पेशी और लंबित मामलों पर नाराज़गी जताते हुए राजस्व कोर्ट की तय तारीखों की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए।
शिक्षा व्यवस्था पर तल्ख़ टिप्पणी: बालोद के कमजोर परीक्षा परिणामों पर सख्त तेवर अपनाते हुए उन्होंने कहा – “परिणाम ठीक नहीं हैं, अफसर जवाबदेह होंगे।”
ड्रोन दीदी और आजीविका मिशन: तकनीक और रोजगार को जोड़ते हुए कहा गया कि ड्रोन ऑपरेटिंग में महिलाओं को प्रशिक्षित कर आजीविका का नया रास्ता खोला जाए।
केंद्र की योजनाओं में 100% क्रियान्वयन का आदेश: आयुष्मान, पीएम आवास, जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को गंभीरता से लागू करने की हिदायत।
मुख्यमंत्री ने बालोद जिले में 500 करोड़ की लागत से बनने वाले उच्चदाब उपकेन्द्र और 11.47 करोड़ की लागत से बनने वाले चिखली मार्ग निर्माण की जानकारी भी साझा की।
जनता से सीधा संवाद, योजनाओं की सच्चाई जानने का तरीका:
मुख्यमंत्री ने बताया कि सुशासन तिहार के तहत वे खुद अलग-अलग जिलों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं और आम जनता से सीधे फीडबैक ले रहे हैं। “जनता का अच्छा फीडबैक बताता है कि बदलाव जमीन पर दिखने लगे हैं,” उन्होंने कहा।
क्या संदेश गया अफसरों को?
अब सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं, उसका असर हर गांव, हर परिवार तक पहुंचे — यही मुख्यमंत्री साय का सीधा और स्पष्ट संदेश था। अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह रहकर त्वरित निर्णय और परिणाम देने होंगे।




















