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चुटकियों में हल हो रहीं वर्षों पुरानी समस्याएं, ‘सुशासन तिहार’ बना जनता की उम्मीदों का केन्द्र”

 

बालोद/डौंडीलोहारा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में चल रहा सुशासन तिहार जन समस्याओं के त्वरित समाधान का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। ‘संवाद से समाधान’ तक की अवधारणा पर आधारित इस अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन से लेकर पंचायत स्तर तक आम लोगों की वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान अब चुटकियों में हो रहा है। इससे शासन-प्रशासन के प्रति लोगों में विश्वास भी बढ़ा है और वे सरकार को साधुवाद दे रहे हैं।

डौंडीलोहारा भाजपा मंडल अध्यक्ष कुसुम शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच के कारण ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों की छोटी-छोटी समस्याओं का निराकरण बेहद तेजी से हो रहा है। आवेदन की स्थिति की जानकारी न केवल मंच से सार्वजनिक रूप से दी जा रही है, बल्कि संबंधित विभागों द्वारा लोगों के घर तक भी भेजी जा रही है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि सुशासन तिहार मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की मंशा को जमीन पर उतारने का सार्थक प्रयास है। उन्होंने बताया कि बालोद सहित समूचे छत्तीसगढ़ में लगाए जा रहे समाधान शिविरों में सैकड़ों समस्याओं का तुरंत निराकरण किया गया है। अब राशन कार्ड, श्रम कार्ड, आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाएं भी आसानी से मिल रही हैं। जमीन रजिस्ट्री में हुए दस क्रांतिकारी सुधारों से लोगों को भारी राहत मिली है। दानपत्र की प्रक्रिया अब केवल 500 रुपए में पूरी हो रही है और नामांतरण अपने आप हो रहा है।

जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र जायसवाल ने कहा कि समाधान शिविर केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूर्ण होने पर रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने के बाद अब सरकार डेढ़ साल की उपलब्धियां भी जनसमूह के सामने रख रही है। नल-जल योजना, प्रधानमंत्री आवास, किसानों को बोनस, श्रीरामलला अयोध्या दर्शन योजना, भूमिहीन कृषि मजदूरों को वार्षिक सहायता और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की स्थापना जैसे कार्य इस सरकार की प्राथमिकताओं में हैं।

अब तक 1460 ग्राम पंचायतों में डिजिटल सेवा केंद्र खुल चुके हैं, जिनसे गांवों में प्रतिदिन 1 से 1.5 लाख रुपए तक के बैंकिंग लेन-देन हो रहे हैं। अगले एक वर्ष में इसे सभी पंचायतों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

निष्कर्षतः, ‘सुशासन तिहार’ शासन की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने प्रशासनिक ढांचे में एक नई ऊर्जा और नागरिकों में नई उम्मीदें जगाई हैं।

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