जल संसाधन विभाग की लापरवाही उजागर, कॉम्प्लेक्स संचालक ने नहर पाटकर बना ली पक्की सड़क

बालोद। 930 नेशनल हाईवे से सटे दल्ली रोड पर गोदली नहर पर एक निजी कॉम्प्लेक्स के संचालक ने सिंचाई विभाग की अनुमति के बिना पुलिया का निर्माण कर दिया है। नहर पाट कर अवैध रूप से बनाई गई यह पुलिया अब सिंचाई व्यवस्था को सीधे प्रभावित कर रही है। इस नहर से किसानों की फसलें सींची जाती हैं और शहर के कई वार्डों में निस्तारी के लिए पानी पहुँचाया जाता है।
जानकारी के अनुसार, पिछले 15 दिनों में कॉम्प्लेक्स संचालक ने अपने परिसर में प्रवेश के लिए सरकारी नहर को पाटकर पहले सीमेंट पाइप डाले और फिर उस पर पक्की पुलिया बना दी। अब इस अवैध निर्माण के कारण क्षेत्र के किसानों में भारी नाराजगी है। सिंचाई बाधित होने की आशंका से वे आक्रोशित हैं।
इस मसले पर जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) पीयूष देवांगन से प्रदेशरुचि संवाददाता नरेश श्रीवास्तव ने दो बार संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। विभाग की इस चुप्पी ने सवालों को और गहरा कर दिया है — क्या यह विभाग की मौन स्वीकृति है?

स्थानीय वार्डवासी भी इस अवैध पुलिया निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग की निष्क्रियता से नहर का अस्तित्व खतरे में है।
यह पहला मामला नहीं —
इससे पहले भी बालोद के गर्ल्स कॉलेज के सामने भूमाफियाओं ने सिंचाई नहर पर अवैध प्लाटिंग के दौरान पुलिया बना दी थी, लेकिन तब भी विभाग मौन बना रहा। गंजपारा क्षेत्र में भी सिंचाई नहर पर अतिक्रमण से उसकी संरचना कमजोर होती जा रही है, लेकिन विभागीय उदासीनता जस की तस बनी हुई है।

जनहित का मामला — जिम्मेदार कब जागेंगे?
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बालोद में सिंचाई नहरों की सुरक्षा विभाग के हाथों में नहीं, बल्कि अतिक्रमणकारियों की मर्जी पर है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग समय रहते एक्शन लेगा या आने वाली खरीफ फसलें पानी के लिए तरसती रहेंगी?




















