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बालोद स्वास्थ्य विभाग में संविदा भर्ती का बड़ा घोटाला! वेटिंग अभ्यर्थियों को दरकिनार कर निकाली गई नई वैकेंसी, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

बालोद। जिले के स्वास्थ्य विभाग पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) के पदों पर संविदा भर्ती में भारी गड़बड़ी की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि नवंबर 2024 में आयोजित परीक्षा के परिणाम को गुपचुप तरीके से जारी कर सिर्फ 4 अभ्यर्थियों की भर्ती की गई, जबकि कुल 8 पद रिक्त थे।

हैरानी की बात ये है कि प्रतिक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को बिना सूचना दिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जो स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है। नियमानुसार, वेटिंग लिस्ट की वैधता एक वर्ष तक रहती है, और रिक्त पदों पर उसी सूची से नियुक्ति की जानी चाहिए।

भर्ती में आरक्षण नियमों की भी अनदेखी?
मामले में मेरिट लिस्ट में भी भारी अनियमितताओं का आरोप है। सामान्य श्रेणी में चार पदों में से एक महिला आरक्षित था, लेकिन महिला अभ्यर्थी को सामान्य सीट पर ही शामिल कर भर्ती की गई। इसी तरह, ओबीसी की एक सीट पर भी बिना सामान्य मेरिट में शामिल किए सीधे चयन किया गया।

भोज साहू ने उठाई आवाज
देवरी निवासी भोज साहू ने इस पूरे मामले की शिकायत जनदर्शन में कलेक्टर से की है और मांग की है कि प्रतिक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को न्याय मिले। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि नए संविदा पदों के लिए बेरोजगारों से DD (डिमांड ड्राफ्ट) के रूप में शुल्क मांगा जा रहा है, जो सरकार के 2022 के आदेश के खिलाफ है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया का पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा।

राजनांदगांव-दुर्ग में निशुल्क भर्ती, बालोद में क्यों वसूली?
राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर जैसे जिलों में संविदा भर्ती में कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा, वहीं बालोद में नियमों को ताक पर रखकर युवाओं से डीडी की मांग की जा रही है।

CMHO ने दी सफाई, पर सवाल बरकरार

CMHO महेश सूर्यवंशी ने कहा कि “पुरानी भर्ती के साथ वेटिंग भी समाप्त हो जाती है। शिकायत करने वाले तो करेंगे ही।” वहीं शुल्क वसूली पर कहा कि कुछ जिलों में लिया जाता है, कुछ में नहीं।

क्या वाकई स्वास्थ्य विभाग में हो रही है पारदर्शी भर्ती?
अब बड़ा सवाल ये है कि क्या बालोद जिले में संविदा भर्ती निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो रही है या फिर यह किसी ‘सिस्टमेटिक सेटिंग’ का हिस्सा है? बेरोजगार अभ्यर्थियों के हक पर इस तरह की प्रशासनिक चुप्पी कहीं बड़ा बवाल न खड़ा कर दे।

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