प्रदेश रूचि

“बालोद NH-930 पर सात मवेशियों की मौत: प्रशासनिक उदासीनता, लापरवाह वाहन चालक और गौपालकों की लापरवाही ने ली जान”..पढ़े पूरी खबर

बालोद। शहर से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे-930 पर एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसे में सात मवेशियों की मौत हो गई, जबकि एक मवेशी गंभीर रूप से घायल है। यह हादसा बीती रात करीब 2 से 5 बजे के बीच दल्ली रोड स्थित शिवनाथ कॉम्प्लेक्स के सामने हुआ, जहां एक अज्ञात वाहन ने इन मवेशियों को कुचल दिया।

घटना की जानकारी सुबह गौ सेवक मनीष पाठक द्वारा दी गई। मौके पर पहुंचे गौसेवकों ने देखा कि सात मवेशी मृत अवस्था में पड़े हैं और एक मवेशी घायल अवस्था में तड़प रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गौ सेवा समिति के जिला अध्यक्ष अजय यादव ने थाने पहुंचकर अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।

अजय यादव ने बताया कि दुर्घटना के बाद मवेशियों के शव क्षत-विक्षत हालत में थे, जिन्हें जेसीबी की सहायता से हटाकर अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार घटनाएं होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों और गौसेवकों का कहना है कि हाईवे पर डिवाइडर नहीं होने, सड़क चौड़ीकरण में देरी और मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए कोई गोठान या कांजी हाउस जैसी व्यवस्था न होने के चलते ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं।

लोगों ने सवाल उठाए हैं कि “रोका-छेका”, “गौठान”, और “कांजी हाउस” जैसी योजनाओं पर भारी राशि खर्च की जा रही है, लेकिन फिर भी मवेशी खुलेआम सड़कों पर घूमते और बैठते नजर आते हैं। यह न केवल मवेशियों के लिए जानलेवा है, बल्कि राहगीरों के लिए भी खतरा बन चुका है।

गौसेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क सुरक्षा, मवेशियों के संरक्षण और अज्ञात वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

1. प्रशासन और नगर पालिका की जिम्मेदारी:

सड़क सुरक्षा की अनदेखी: NH-930 जैसी व्यस्त सड़क पर डिवाइडर, संकेतक और सुरक्षा उपायों की कमी साफ प्रशासन की लापरवाही दर्शाती है।

गोठान व कांजी हाउस का अभाव: नगर पालिका द्वारा मवेशियों के लिए स्थायी व्यवस्था (गोठान, कांजी हाउस) नहीं की गई, जिससे मवेशी खुलेआम सड़कों पर घूम रहे हैं।

अभियान की कमी: मवेशियों को पकड़ने और सड़क से हटाने के लिए कोई नियमित अभियान नहीं चलाया जा रहा, जो दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है।

योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर: “रोका-छेका”, “गौठान” जैसी योजनाओं पर खर्च तो हुआ, लेकिन ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन बेहद कमजोर है

2. गौपालकों की लापरवाही:

उपयोग के बाद मवेशियों को छोड़ना: दूध देने के बाद मवेशियों को सड़कों पर छोड़ देना एक गंभीर लापरवाही है। यह न केवल मवेशियों के लिए, बल्कि आम लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।

उत्तरदायित्व का अभाव: कई गौपालक अपने मवेशियों को चिन्हित नहीं करते या ट्रैक नहीं रखते, जिससे दुर्घटना होने पर जवाबदेही तय करना मुश्किल होता है।

3. लापरवाह वाहन चालकों की भूमिका:

तेज रफ्तार और लापरवाही: दुर्घटना के समय वाहन की रफ्तार ज्यादा होना और मवेशियों की मौजूदगी की परवाह न करना सीधे वाहन चालक की गलती है।

रात के समय सुरक्षा उपायों की अनदेखी: रात्रि में वाहन चलाते समय उचित सावधानी (हेडलाइट्स, हॉर्न, गति सीमा) का पालन न करना भी हादसे का कारण बना।

हिट एंड रन मामला: दुर्घटना के बाद वाहन चालक द्वारा मौके से फरार होना अपराध है और इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता।

यह घटना सिर्फ एक गलती का परिणाम नहीं है, बल्कि एक “सिस्टम फेलियर” है — जिसमें प्रशासन, गौपालक और लापरवाह वाहन चालकों सभी की भूमिका है। समाधान तभी संभव है जब तीनों पक्ष अपनी जिम्मेदारी समझें और ठोस कदम उठाए जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!