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नीति आयोग की बैठक में ‘विकसित भारत @2047’ पर राज्यों और केंद्र की साझा रणनीति..लेकिन बैठक के बीच से ही यहां के मुख्यमंत्री लौटे

नई दिल्ली,— राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आज नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का आयोजन हुआ। इस अहम बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। मुख्य विषय था – ‘विकसित राज्य, विकसित भारत @2047’, यानी देश को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करना।

प्रधानमंत्री ने बैठक की शुरुआत करते हुए सभी मुख्यमंत्रियों से ‘टीम इंडिया’ की भावना से काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र और राज्य मिलकर योजनाओं पर काम नहीं करेंगे, तब तक देश विकास की गति को तेजी से हासिल नहीं कर पाएगा।

बैठक में उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड सहित कई राज्यों ने अपने-अपने विजन डॉक्यूमेंट और योजनाएं प्रस्तुत कीं। उत्तर प्रदेश ने अपनी अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप साझा किया। छत्तीसगढ़ ने गांवों में 24×7 बिजली, स्वच्छ जल और नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित योजनाओं का खाका रखा।

बैठक में यह भी साफ दिखा कि कुछ विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने बैठक से दूरी बनाए रखी। हालांकि, इसके बावजूद कई राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे और उन्होंने अपने विचार साझा किए।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बैठक में शामिल हुईं लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलने पर वे बीच में ही लौट गईं, जो चर्चा का विषय बना रहा।

बैठक में केंद्र की ओर से यह दोहराया गया कि ‘विकसित भारत @2047’ कोई एक मंत्रालय या राज्य की योजना नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की साझा जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ नीति आयोग ने सभी राज्यों से अपने-अपने क्षेत्रीय विकास रोडमैप साझा करने का आग्रह किया।

बैठक में सामाजिक कल्याण, आर्थिक प्रगति, पर्यावरणीय संरक्षण, और सुशासन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य है कि अगले 22 वर्षों में भारत हर पैमाने पर विकसित राष्ट्रों की कतार में खड़ा हो।

यह बैठक न केवल योजनाओं के तालमेल का मंच बनी, बल्कि यह भी दिखा कि देश की राजनीतिक विविधता के बावजूद, विकास के मुद्दे पर एक साझा दिशा की जरूरत अब पहले से कहीं ज्यादा है।

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