अब खादी सिर्फ पारंपरिक कपड़ा नहीं, बल्कि कॉलेज गोइंग युवाओं, वर्किंग प्रोफेशनल्स और इको-फ्रेंडली फैशन पसंद करने वालों के लिए स्टाइल स्टेटमेंट बनने जा रही है। ट्रेंडी डिज़ाइन्स, फ्यूज़न वियर और मॉडर्न टेक्सटाइल तकनीकों का मेल खादी को देगा नया रूप।
डिज़ाइनिंग में अब एडवांस सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्रिंटिंग और इंटरनेशनल क्वालिटी टेक्निक्स का इस्तेमाल होगा, ताकि छत्तीसगढ़ की खादी को दुनिया भर के बाजारों में पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही, खादी अब ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और सोशल मीडिया के जरिए भी सीधे ग्राहकों तक पहुंचेगी।

युवाओं को खादी से जोड़ने के लिए यूनिवर्सिटीज़ में फैशन शो, वर्कशॉप और इनोवेशन कॉम्पिटिशन्स कराए जाएंगे। खादी को स्कूली यूनिफॉर्म, सरकारी ड्रेस कोड और कॉर्पोरेट गिफ्टिंग में शामिल करने की भी योजना है।
इसके अलावा, खादी के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेशनल एक्सपो में छत्तीसगढ़ की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और एक्सपोर्ट क्वालिटी प्रोडक्ट्स की एक अलग लाइन भी तैयार की जाएगी।
राकेश पांडेय का कहना है, “खादी अब सिर्फ रोज़गार का जरिया नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगी – और वो भी ग्लोबल स्टाइल में!”
इस कार्यक्रम में कई अधिकारी और खादी प्रेमी मौजूद रहे, जिन्होंने इस बदलाव की रूपरेखा पर चर्चा की और सहयोग का आश्वासन दिया।




















