प्रदेश रूचि

सांकरा की ओसजल फैक्ट्री विवादों में, पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल — जांच रिपोर्ट का इंतजार

बालोद ( प्रदेशरुचि ब्यूरो)। बालोद जिले के ग्राम सांकरा (करहीभदर) में संचालित ओस जल फैक्ट्री इन दिनों विवादों में घिर गई है। फैक्ट्री से सप्लाई किए जा रहे जार, बोतल और पाउच पानी की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री बिना तय मानकों का पालन किए मनमानी ढंग से पानी का उत्पादन कर रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि शिकायतों के बाद खाद्य विभाग की टीम ने फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया और वहां से पानी के नमूने जांच के लिए जब्त किए।

 

खाद्य विभाग की जांच में मिलीं खामियां

खाद्य सुरक्षा अधिकारी भारत भूषण पटेल ने जानकारी दी कि हाल ही में विभाग की टीम ने ओस जल फैक्ट्री में निरीक्षण किया। वहां पानी के ठहराव, साफ-सफाई की कमी, और व्यवस्थागत अव्यवस्था पाई गई।

> “हमने फैक्ट्री संचालक को साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए हैं। गुणवत्ता की जांच प्रयोगशाला में की जा रही है, रिपोर्ट के बाद ही पुष्टि होगी कि पानी मानक के अनुरूप है या नहीं।” — भारत भूषण पटेल

रायपुर कालीबाड़ी स्थित लैब में जांच के लिए भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर आने की संभावना है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक फैक्ट्री संदेह के घेरे में बनी हुई है।

 

ग्रामीणों की चिंता: “हमारी सेहत से खिलवाड़!”

कुछ स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि फैक्ट्री गांव में संचालित हो रही है, लेकिन इसके संचालन में नियमों का कोई पालन नहीं हो रहा। अधिकतर ग्रामीण आयोजनों—जैसे शादी-ब्याह या अन्य कार्यक्रमों—में पानी की आपूर्ति यहीं से की जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि भोले-भाले लोगों की नासमझी का फायदा उठाकर संचालक कम गुणवत्ता वाला पानी बेच रहा है, जो लंबे समय में बीमारियों को न्योता दे सकता है।

हाल ही में जिले के कुछ गांवों में पीलिया के मामले सामने आए हैं, जिससे ग्रामीण और भी सतर्क हो गए हैं।

 

क्या हैं जार जल फैक्ट्री के लिए नियम?

जार, बोतल और पाउच पानी का उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों को कुछ कड़े मानकों का पालन करना होता है। इनमें प्रमुख हैं:

1. पर्यावरण और जल स्रोत संरक्षण

पानी के स्रोत की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।

शुद्धिकरण प्रक्रिया का सही पालन।

अपशिष्ट जल का सुरक्षित निष्पादन।

2. स्वच्छता और गुणवत्ता नियंत्रण

नियमित लैब परीक्षण और निरीक्षण।

स्वच्छ उत्पादन स्थल और कर्मचारियों के लिए हाइजीन प्रोटोकॉल।

3. वैध लाइसेंस और लेबलिंग

संचालन के लिए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन।

उत्पाद पर निर्माण/एक्सपायरी तिथि, पानी की गुणवत्ता और अन्य जानकारियां।

4. कर्मचारी सुरक्षा

कर्मचारियों को सेफ्टी गियर और प्रशिक्षण देना।

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पहले भी हुई थीं शिकायतें, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं

यह पहला मौका नहीं है जब बालोद जिले की जल फैक्ट्रियों पर सवाल उठे हों। प्रदेशरुचि ने पूर्व में भी जल फैक्ट्रियों की मनमानी, अवैध संचालन और नियमों की अनदेखी पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से सख्त और ठोस कार्रवाई न होने के चलते कई जल फैक्ट्रियाँ आज भी नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही हैं।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर

ओस जल फैक्ट्री से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि रिपोर्ट में गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो फैक्ट्री पर कार्रवाई की मांग और तेज हो सकती है।

यह मामला प्रशासन के लिए भी सवालों के घेरे में है कि ग्रामीण इलाकों में बिना उचित निगरानी के जल उत्पादन इकाइयाँ कैसे चल रही हैं?

 

आपकी राय क्या है?

क्या आपके गांव या क्षेत्र में भी इस तरह की जल फैक्ट्रियाँ संचालित हो रही हैं? क्या कभी आपको भी पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हुआ है? नीचे दिए व्हाट्सएप नंबर पर कॉमेंट करें या हमें अपनी जानकारी भेजें।

Mob. 9406208242,7000553221

 

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