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“संवेदना और सम्मान: पुलिस की अनोखी पहल में बालक बना ‘बाल आरक्षक’”

बेमेतरा, छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पुलिस विभाग ने एक संवेदनशील और प्रेरणादायक कदम उठाते हुए शहीद आरक्षक संदीप वर्मा के पुत्र आलोक वर्मा को ‘बाल आरक्षक’ की उपाधि से सम्मानित किया। मात्र सात वर्ष की आयु में आलोक को यह सम्मान देते हुए बेमेतरा पुलिस ने दिखाया कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था ही नहीं संभालती, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीयता की मिसाल भी पेश करती है।

आरक्षक संदीप वर्मा का आकस्मिक निधन 3 मार्च 2025 को ड्यूटी के दौरान हो गया था। घटना के बाद दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल  गर्ग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

एसएसपी कार्यालय में हुए एक सादे समारोह में पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू ने आलोक को नियुक्ति पत्र सौंपा। उन्होंने आलोक के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “अब आप भी पुलिस परिवार का हिस्सा हैं।” यह दृश्य वहाँ मौजूद सभी अधिकारियों की आँखें नम कर गया।

इस अवसर पर आलोक अपनी मां प्रीतिलता वर्मा और चाचा संजय वर्मा के साथ उपस्थित था। परिवार ने बेमेतरा पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल उनके लिए सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि एक नया संबल है।

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