बालोद के डौंडी ब्लॉक के गुदुम गांव में लगा समाधान शिविर, सुशासन तिहार के तहत ग्रामीणों को मिला राहत
बालोद।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे सुशासन तिहार अभियान के तहत अब शासन-प्रशासन ग्रामीण अंचलों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर रहा है। इसी कड़ी में बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांव गुदुम में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और उन्होंने अपने विभिन्न प्रकार की समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनका त्वरित निराकरण किया गया।
शिविर में कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने राशन कार्ड, पेंशन, बिजली कनेक्शन, पेयजल, सड़क मरम्मत और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं। अधिकारियों ने कई मामलों में तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए समाधान की प्रक्रिया शुरू की।
मेधावी छात्रा को किया गया सम्मानित
समाधान शिविर के दौरान उस समय माहौल उत्साहपूर्ण हो गया जब हाल ही में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 10वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश की टॉप-3 सूची में स्थान प्राप्त करने वाली एक स्थानीय छात्रा को सम्मानित किया गया। सांसद भोजराज नाग और अधिकारियों ने छात्रा को मंच पर प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
सांसद ने मानीं क्षेत्रीय कमियां
मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद भोजराज नाग ने स्वीकार किया कि डौंडी ब्लॉक जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में अब भी कई मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, “कुछ कमियाँ जरूर हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की पूरी कोशिश है कि हर व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। विकास एक सतत प्रक्रिया है, और जैसे-जैसे समस्याएं सामने आती हैं, उनका समाधान भी किया जाता रहेगा।”
ग्रामीणों में समाधान शिविर को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया
शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने समाधान शिविर की सराहना करते हुए कहा कि पहले कई बार आवेदन देने के बावजूद समाधान नहीं होता था, लेकिन इस शिविर में उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सभी समस्याओं का निराकरण एक दिन में संभव नहीं, लेकिन इस पहल से प्रशासन पर भरोसा ज़रूर बढ़ा है।
स्थायी समाधान की ज़रूरत बनी हुई
डौंडी ब्लॉक के कई गांवों में अब भी जल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि समाधान शिविर जैसी पहलें केवल तात्कालिक राहत तक सीमित रहती हैं या फिर इनका प्रभाव दीर्घकालिक विकास में भी नजर आता है।




















