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अब शिक्षा में क्रांति, उद्योगों को प्रोत्साहन और संस्कृति को सम्मान – जानें कैबिनेट के 10 बड़े फैसले

रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बार फिर साबित किया है कि विकास, समानता और सशक्तिकरण उनकी शासन नीति के मूल में है। आज मंत्रालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों से यह स्पष्ट हो गया कि सरकार न केवल वर्तमान की जरूरतों को समझ रही है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी ठोस योजनाएं बना रही है।

मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान – भविष्य की नींव

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत “मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान” की शुरुआत का निर्णय लिया है, जो स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने, शिक्षक-अभिभावक सहभागिता बढ़ाने और विद्यार्थियों की प्रगति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया जाएगा।

सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से स्कूलों की ग्रेडिंग।

कमजोर शालाओं की निगरानी में प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी।

मॉडल स्कूलों का शैक्षणिक भ्रमण।

प्रभावी पीटीएम से अभिभावकों की सहभागिता।

कक्षा शिक्षण में नवाचार व सुधार।

यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार केवल भवन निर्माण या आंकड़ों में नहीं, बल्कि शिक्षा की आत्मा को सुधारने पर केंद्रित है।

कलाकारों को मिला सम्मान और सहारा

संस्कृति और कला को संरक्षण देने की सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है वह निर्णय जिसमें अर्थाभाव से जूझ रहे कलाकारों और साहित्यकारों की मासिक सहायता राशि को 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है।

इससे 162 कलाकारों को सीधे राहत मिलेगी।

सरकार पर लगभग 58.32 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक भार आएगा – जो संस्कृति में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

यह निर्णय न केवल राहत है, बल्कि एक संकेत है कि सरकार अपने सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत रखना चाहती है।

औद्योगिक विकास की नई दिशा

सरकार ने औद्योगिक भूमि प्रबंधन नियमों में संशोधन कर भूमि आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने की पहल की है। इसके साथ ही औद्योगिक नीति 2024-30 को अपडेट कर छत्तीसगढ़ को उद्योग, रोजगार और नवाचार का केंद्र बनाने की योजना का खाका प्रस्तुत किया है।

प्रमुख आकर्षण:

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली कंपनियों को विशेष अनुदान।

हाइड्रोपोनिक-ऐयरोपोनिक खेती को तकनीकी सहायता।

खेल अकादमी और प्रशिक्षण केंद्रों को प्रोत्साहन।

कपड़ा उद्योग को 200% तक का प्रोत्साहन।

पर्यटन, होटल और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में विशेष रियायतें।

दिव्यांगजनों को नई परिभाषा के तहत अधिक योजनाओं में समावेश।

मिनी मॉल व CBSE स्कूलों को थ्रस्ट सेक्टर में शामिल कर नगरीय विकास को प्रोत्साहन।

सरकार की दृष्टि – समावेशी और दूरदर्शी

इन निर्णयों से यह स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ सरकार एक ऐसी शासन व्यवस्था की ओर बढ़ रही है जो “सबका साथ, सबका विकास” को केवल नारा नहीं, नीति के रूप में आत्मसात कर चुकी है।

राज्य अब न केवल औद्योगिक रूप से विकसित होगा, बल्कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, शैक्षिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से संवेदनशील भी बनता चला जाएगा।

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