‘अभिप्रेरणा ग्रुप’ की शुरुआत जिले की कुछ शिक्षिकाओं द्वारा की गई थी, जिनका उद्देश्य तपती गर्मी में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना है। यह समूह न केवल स्वयं परिंडे (जल पात्र) और दाना पात्र रख रहा है, बल्कि घर-घर जाकर मिट्टी के सकोरे और चावल के दाने भी बांट रहा है। साथ ही, लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने घरों की छतों और आंगनों में भी मूक प्राणियों के लिए अन्न-जल की व्यवस्था करें।

धार्मिक आस्था से जोड़ कर सेवा का संदेश
नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्वों के बाद उपयोग में आए मिट्टी के कलशों को फेंकने के बजाय जल पात्र के रूप में उपयोग करने की इस समूह की पहल ने लोगों का दिल छू लिया है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम है, बल्कि धर्म और सेवा को एक साथ जोड़ने का सुंदर उदाहरण भी बन चुका है।
हर वर्ग की सहभागिता
इस मुहिम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अंचल प्रकाश साहू, पार्षद विनोद ‘बंटी’ शर्मा, नाड़ी वैद्य एवं संत वीरेंद्र देशमुख, शिक्षक शिव श्रीवास्तव, रेडक्रॉस वाइस चेयरमैन कमला वर्मा, समाज सेविका प्रीति टाटिया, भारती सहारे, शिक्षिका गीतांजलि सिंग, लक्ष्मी कलिहारी समेत अजय यादव, अश्वन कुमार बारले, जितेंद्र कुमार सोनी, संदीप दुबे जैसे नाम इस अभियान से जुड़े हैं। धर्मगुरु अपने प्रवचनों में भी अब मूक प्राणियों की सेवा को सच्चा धर्म बताने लगे हैं।

सम्मान से बढ़ रही जागरूकता
‘अभिप्रेरणा ग्रुप’ द्वारा उन लोगों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है, जो अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था शुरू करते हैं। इससे लोगों में सेवा की भावना और भी प्रबल हो रही है।

सोशल मीडिया के जरिये फैल रहा संदेश
यह मुहिम अब सोशल मीडिया के माध्यम से बालोद जिले की सीमाओं को पार कर अन्य जिलों और शहरों तक पहुंच रही है। शिक्षक, छात्र, सामाजिक संगठन और आमजन सोशल मीडिया पर इस पहल का समर्थन करते हुए इससे जुड़ते जा रहे हैं।
एक छोटा कदम, बड़ा असर
‘अभिप्रेरणा ग्रुप’ यह संदेश दे रहा है कि अगर हर घर एक सकोरा और एक थाली दाना रखे, तो हज़ारों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है। यह अभियान केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाने वाला भी बन चुका है।
इस अभियान की मुख्य प्रेरक शक्ति बनी हैं — कादम्बिनी यादव (व्याख्याता), गायत्री साहू (व्याख्याता), नीलम रावटे (सहायक ग्रेड), पद्मनी साहू (राजनीतिक), शिव श्रीवास्तव (शिक्षक), कमला वर्मा (सेवानिवृत्त व्याख्याता व रेडक्रॉस वाइस चेयरमैन), प्रीति टाटिया, भारती सहारे, गीताजली सिंग, लक्ष्मी कलिहारी, वीरेंद्र देशमुख, शरद ठाकुर, विनोद ‘बंटी’ शर्मा, अंचल प्रकाश साहू, जितेंद्र कुमार सोनी, अजय यादव, संदीप दुबे सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि और समाजसेवी।
यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि चेतना है — जीवनदायिनी, प्रेरणादायी और अनुकरणीय।




















