
राजनांदगांव – ग्रामीण इलाको में जहां पर स्वास्थ्य का समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं वहां पर झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला रहता है । और इसी के चलते इन इलाको में ऐसे डाक्टरों की मनमानी चलती है। ऐसा ही मामला सामने आया है राजनांदगांव जिले के छुरिया ब्लाक में जहां डाक्टर की लापरवाही ग्रामीण को भारी पड़ा और अपनी जान गंवानी पड़ी।
पूरे मामले की जानकारी बालोद भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी ने देते हुए बताया कि छुरिया के ग्राम नदिया खुर्द जहाँ मरीज स्वर्गीय रामदास सिन्हा का अचानक तबियत खराब होने पर बम्हनी चारभाठा में गिधवा के डॉक्टर चेतन साहू के क्लिनिक बम्हनी में ले जाया गया जहाँ डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन के कारण मरीज की मृत्यु हो गई । संदीप सिन्हा ने बताया कि जब मरीज तड़पने लगा तब घर वालों ने डॉक्टर को बताया कि आपके द्वारा दिया गया इंजेक्शन के कारण मरीज का तबियत और खराब होने लगा है और वो आधा घंटा आपके क्लीनिक में आराम करना चाहता है परंतु डॉक्टर ने अपने घर मे आये मेहमान को छोड़ने जाने का बहाना बनाकर पीड़ित परिवार को उनके हालत पर वही छोड़कर कह दिया कि कुछ नही होगा आप लोग मरीज की आंखे बंद करके उसको छुरिया ले जाओ जब कि डॉक्टर जान चुका था कि मरीज ज्यादा समय का साथी नही है उसका बचना नामुकिन है इससे पहले की मरीज छुरिया पहुच पाता चंद कदमो की दूरी पर मरीज की मृत्यु हो गई ।
मामले पर संदीप सिन्हा ने बताया कि डॉक्टर चेतन साहू के द्वारा पूर्व में भी मरीजों को इनके गलत दवाई के वजह से 4 से 5 व्यक्तियों के मौत का जिम्मेदार माना गया है डॉक्टर के पास न कोई डिग्री है ना ही किसी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की सर्टिफिकेट इसके बावजूद ब्लॉक से सटे गांव में इस तरह का वाक्या होना बहुत सारे सवाल खड़े करते हैं ।
सिन्हा ने बताया कि चिकित्सा विभाग अपने जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसे छोला छाप डॉक्टरों पर शिकंजा कसने के बजाय उन्हें श्रय देते हैं चिकित्सा विभाग की विगत कुछ महीनों की कार्यशैली पर नजर डाला जाए तो विवादों से इनका पुराना इतिहास रहा है कभी महिला चिकित्सा अधिकारी से छेड़छाड़ तो कभी छोला छाप डॉक्टरों से साठ गांठ ….! देखना होगा कि आगे स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर क्या कार्यवाही करती है।