प्रदेश रूचि

*सरपंच संघ आंदोलन में नया ट्वीस्ट.मंत्री से मिले इस आश्वासन के चलते प्रदेश सरपंच संघ ने आंदोलन से किया किनारा..लेकिन कुछ ब्लाकों में जारी आंदोलन के पीछे क्या है वजह…पढ़े पूरी खबर*

 

बालोद- छत्तीसगढ़ में आज कई ब्लाक मुख्यालयों सहित बालोद जिले के 3 ब्लाक मुख्यालयों में सरपंच संघों द्वारा 13 सूत्रीय मांगों को लेकर किये जा रहे धरना प्रदर्शन के बीच इस धरने पर ही सवाल खड़े होने लगा है । सरपंचो द्वारा अपने हक और अधिकार को लेकर कर रहे आन्दोलन को आखिर प्रदेश सरपंच संघ के अलावा जिला सरपंच संघ का समर्थन नही मिलने के बाद इस आन्दोलन पर सवाल उठने लगे लगे थे कि आखिर अपने ही अधिकारों के लिए किए जा रहे आंदोलन में सरपंच संघ अलग अलग भागो में क्यो बंटा जिसको लेकर प्रदेशरूचि ने पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया । जिसके बाद इस पूरे मामले में प्रदेशरूचि संपादक ने इस आंदोलन में जिलाध्यक्ष का समर्थन नही मिलने के पीछे कारणों को पता करने जिलाध्यक्ष से बात की गई जिस पर सरपंच संघ जिलाध्यक्ष लेखक चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेश सरपंच संघ लगातार प्रदेशभर के सरपंचो के समस्याओं को लेकर सूबे के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के अलावा मुख्यमंत्री के पास भी अपनी मांगों को रख चुके है और पंचायत प्रतिनिधियों के समस्यायों से लगातार शासन को भी अवगत करा रहे है । वही इस पूरे मामले में सरपंच संघ जिलाध्यक्ष लेखक चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेश सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल धीवर सहित प्रतिनिधिमंडल ने सरपंचो की मांगों को लेकर प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकासमंत्री रविंद्र चौबे से मुलाकात किये सरपंचो के समस्याओं से अवगत भी कराए जिस पर मंत्री रविन्द्र चौबे द्वारा सरपंचो के सभी समस्याओं का 10 दिनों के भीतर समाधान करने का आश्वासन दिया गया साथ ही पंचायत के अन्य समस्याओं का भी समाधान करने का आश्वाशन पंचायत मंत्री द्वारा दिये जाने के बाद प्रदेश सरपंच संघ द्वारा किसी भी तरह के आंदोलन का ऐलान नही किया ।

प्रदेश सरपंच संघ के बिना समर्थन का आंदोलन के क्या मायने

छत्तीसगढ़ में जब कुछ ब्लाकों में सरपंचो द्वारा कलमबंद आंदोलन जारी है वही दुसरीं तरफ कुछ ब्लाकों में सरपंचो द्वारा किसी भी तरह का आंदोलन नही किये जा रहे है जिसके बाद इस आंदोलन पर भी राजनीति की आशंका व्यक्त की जा रही है जिस पर बालोद जिला सरपंच संघ जिलाध्यक्ष लेखक ने कहा कि सरपंच एक गैर राजनीतिक पद है ग्रामीण विकास में पंचायत प्रतिनिधि का योगदान अहम होता है इसलिए पंचायतीराज का राजनीतिकरण किया जाना सही नही है ।जिला व प्रदेश सरपंच संघ हमेशा सरपंचो के साथ है। सरपंचो की समस्या पर मंत्री से मुलाकात किये जाने के बाद मंत्री ने सरपंचो के सभी समस्याओं का निराकरण किये जाने का आश्वाशन दिया गया जिसके।चलते प्रदेश सरपंच संघ किसी भी तरह का कोई आंदोलन नहीं कर रहा है । लेकिन इसके बाद भी प्रदेश के अलग अलग जिलों के कुछ विकासखंडों में जारी आंदोलन ने सरपंच संघ के बीच एक लकीर खींच दी है देखना होगा ब्लाकों में जारी आंदोलन आगे किस तरह का रुख अख्तियार करती है ।क्या आगे इन्हें प्रदेश सरपंच संघ का समर्थन मिलेगा या बिना समर्थन के आंदोलन जारी रहेगा या फिर सरपंच संघ को मिले इस आश्वासन के आधार पर प्रदेश के कुछ तहसीलों में.जारी आंदोलन को वापस लिया जाएगा…?

*जिले के सिर्फ 3 विकासखंडों में सरपंचसंघ का आंदोलन हुआ प्रारंभ…. लेकिन इस आंदोलन को जिला सरपंच संघ का नही मिला समर्थन…मामले पर क्या कहते है जिलाध्यक्ष… पढ़े पूरी खबर*

 

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