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*बाल बाल बचा चारपहिया वाहन….बारिश के चलते पुल पर बने सड़क का बड़ा हिस्सा बहा…..लाटाबोड़ हल्दी मार्ग पर चारपहिया वाहनों आवाजाही हुआ बंद..*

बालोद- विगत दिनों लगातार बारिश से ग्राम बोरी-सेमरिया नाले में बाढ़ आने से पुलिया ही बह गई। बालोद ब्लाक के ग्राम बोरी सेमरिया नाले का पुलिया की मरम्मत बीते साल ही की गई थी। अब पानी में ही बह गई है, जिससे सड़क पूरी तरह कट गई है। जिसमे बड़े बड़े बोल्डर दिखाई दे रही हैं। छोटे पुलिया को तोड़कर नया पुल बनाने की मांग ग्राम बोरी व आसपास के ग्रामीण 15 वर्षों से कर रहे हैं लेकिन शासन-प्रशासन इसकी सुध तक नही ले रहा है, जिसके कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। हर साल बारिश के दिनों में इस नाले में बाढ़ आ जाने पर यह पुलिया डूब जाती है और यह मार्ग सप्ताहभर तक बंद हो गया है। बड़़े वाहनों का आना जाना भी बंद हो जाता हैं। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री सड़क विभाग ने उक्त पुल निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को सौप दिया हैं।वही क्षेत्रीय विधायक संगीता सिन्हा के प्रयास से सेमरिया नाले में पुल बनाने के लिए छग विधानसभा के बजट में शामिल किया गया हैं।वही लोक निर्माण विभाग उक्त पुल निर्माण के लिए सेतु निगम को प्रपोजल बनाकर भेजने की बाते अधिकारी द्वारा कही जा रही हैं।

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जान जान जोखिम में डालकर ग्रामीण बड़े बड़े बोल्डर से कर रहे आवाजाही

बोरी-सेमरिया मार्ग टूट जाने से दुपहिया चारपहिया वाहनों की आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। रात के समय सफर की खतरे से कम नहीं है क्योकि पुलिया टूटने से जगह जग गड्ढा हो गया है।पुल के बह जाने पर गड्ढे होने और गिट्टियां उखड़ जाने से पुल के ऊपर से गुजरने वाले वाहन चालकों बाईक चालकों साइकिल व पैदल चलने वाले लोगों को बहुत दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। पुल के ऊपर पानी होने के कारण राहगीरों को पता ही नहीं चल पाता की गड्ढा कहां पर है जैसे ही लोग साइकिल, बाईक या अन्य वाहनों से सड़क से पुल के लिए उतरते है तो फट से सीधे गड्ढे में गिर जाते हैं और डगमगा जाते हैं। यह गड्ढा कभी भी किसी घटना को अंजाम दे सकता है।

सेमरिया नाले से होकर आना जाना करते है 20 गांव के ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम बोरी सेमरिया नाला में बने जर्जर व छोटे पुल से होकर 20 गांव के लोग जिला मुख्यालय जाते हैं। सैकड़ों बेटियां पढ़ाई करने व अन्य शासकीय कार्य से बालोद, लाटाबोड़, बेलौदी जाते हैं पर पुलिया डूब जाने के बाद तो मार्ग ही बन्द हो जाता है जिससे छात्र छात्राएं पढ़ाई करने स्कूल-कॉलेज नहीं जा पाते। बता दें कि हर साल बाढ़ में पुलिया बह जाता है। विभाग ने 15 सालों में सिर्फ टूटी पुलिया को बनाने करोड़ों रुपए खर्च कर डाले हैं। उतनी लागत में नया पुल बन कर तैयार हो जाता। बीते साल ग्रामीणों ने नाले में पुल बनाने के लिए हड़ताल की थी। पीडब्ल्यूडी ने आश्वासन दिया था कि हर हाल में पुल बनाने का प्रयास किया जाएगा पर अभी तक सिर्फ ग्रामीणों को आश्वासन मिला।

“सेमरिया पुल निर्माण के लिए सेतु निगम को प्रपोजल बनाकर भेजा गया हैं। अजय नाथ,एसडीईओ लोक निर्माण विभाग”

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