
मेहनत के अनुसार नहीं मिल रहे हैं पैसे
छग रसोईया संध के जिलाध्यक्ष ने बताया कि मंगलवार को रसोईया सन्ध ने अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर या धरना प्रदर्शन किया है. रसोईया दीदीयां वर्षों से मानदेय राशि पर निष्ठापूर्वक काम कर रहे है. महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन रसोईयों के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है. बीते कई सालों से मेहनत के हिसाब से पैसे नहीं मिलते हैं.
समान काम के बदले समान वेतन
रसोइयों की मांग है कि समान काम के बदले समान वेतन मिलना चाहिए।रसोइयों की बहाली के समय 500 रुपया वेतन था. जिसे बढ़ा कर 1650 रुपया किया गया है। ऐसा तब था जब शिक्षामित्र की बहाली हुई थी, लेकिन आज शिक्षामित्र के शिक्षकों का वेतन 30 हज़ार के करीब है।जबकि हम लोगों का वेतन उनके वेतन के अनुकूल आधा भी नहीं. इसे लेकर बिहार सरकार से तीन सूत्री मांग की गई है।

ये है रसोइयों की मांग
इसमें पहली मांग है कि रसोईयों को का समय निर्धारण करें। कोर्ट द्वारा 9780 रुपये का प्रति माह मानदेय प्रदान करें। रसोईयों की नियुक्ति व हटाने अधिकार शासन स्तर पर किया जाये।
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रसोइया सन्ध के जिलाध्यक्ष ने कहा कि अगर सरकार हम लोगों की मांगे पूरी नहीं करेगी तो आगे भी अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखने की भी चेतावनी दिया है। इस मौके पर सैकड़ो रसोईया संघ की रसोइयां मौजूद थीं.




















