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प्रदेश रूचि

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जब घोड़े पर निकली सवारी तो पहले लोग समझे कोई वैवाहिक समारोह है…लेकिन जब सामने से देखे तो….

बालोद -दीक्षार्थी बहना लब्धि सकलेचा की बंदौली धूमधाम से ठीक उसी तरह से निकाली गई जैसे दूल्हे की घोड़े मे बिठाकार निकाली जाती है ।पूरा माहौल बारात जैसा था।
नाचते गाते बंदौली महावीर भवन से जैनमंदिर पहुंचा वहां दीक्षार्थी लब्धि का मंदिर के द्वार पर परंपरागत ढंग से द्वार-चार का दस्तूर कर प्रवेश कराया गया।मंदिरमे चरम उत्साह के साथ आरती ओर भक्ति कीगई।

उल्लेखनीय है कि दीक्षार्थी लब्धि का दीक्षा के पूर्वसभी आयोजन शादी के आयोजन की तरह धूम धाम से किया जा रहा है लेकिनदीक्षा लेने के बाद लब्धि का पुराजीवन सादगी और संयम के साथ बीतेगा। न रंगीन वस्त्र होंगे ,न पैरों में चप्पल होगी ,न सुंदर बाल होंगे न सोने के लिए पलंग होगा।सुख सुविधा के सारे साधन छूट जाएंगे।
संयम और साधना के राह को चुनने वालो के लिए यह त्याग अपने उद्देश्य के आगेबहुत ही छोटालगता है यही कारणहै की दीक्षार्थी के चेहरे पर एक अलग ही आभा दिखाई देती है।
16 नवंबर तक विभिन्न आयोजनहोंगें इसके पश्चात अंतिम बार घर जाएगी घर कि दहलीज पार करने के पश्चात फिर वह घर पराया हो जाएगा।बिदाई की बेला में समाज के लोग मुमक्षु लब्धि को अपना पूरा स्नेह औऱ आशीष दे रहे हैं।16 तारीख को भव्य बरघोडा निकाली जाएगी तथा अभिनंदन का कार्यक्रम होगा।

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