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अपने संवैधानिक अधिकार व 10 सूत्रीय मांग को लेकर आयोजित चक्काजाम .में .आम लोगो से लेकर पुलिस विभाग जिला प्रशासन से लेकर जिला सत्र न्यायाधीश को करना पड़ा परेशानियों का सामना

 

बालोद- छग सर्व आदिवासी समाज जिला एवं ब्लॉक इकाई द्वारा आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार एवं 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार को महाबंद करने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत आदिवासी समाज के लोग बालोद में दल्ली चौक, धड़ी चौक, पड़कीभाट बाईपास, घोटिया चौक, गुरुर में पुरुर नेशनल हाईवे, रानी दुर्गावती चौक, गुंडरदेही में अर्जुन्दा शहीद वीर नारायण सिंह चौक, डौण्डीलोहारा में विवेकानंद चौक, डौण्डी में मथाई चौक और मानपुर चौक को पूरी तरह बंद कर चक्काजाम कर दिया गया है ।जिसके चलते लोगो को आने जाने में परेशानी हो रही है।उक्त सभी मार्गो में सर्व आदिवासी समाज की महिलाएं व पुरुष बड़ी सख्या में बैठकर सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।यहाँ तक दुपिया और सायकल चालक को आने जाने नही दिया जा रहा है जिसके चलते आने जाने वालों ने आदिवासी के लोगो पर नाराजगी जाहिर किया है।वही कई स्थानों पर आदिवासी समाज और आने जाने लोगो मे विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी जिस पर पुलिस पहुचकर मामले को शांत कराया गया। इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के लोगो ने महाबंद को सफल बनाने के लिए बालोद शहर में धूम धूमकर में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया।इस दौरान पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था किया गया।


सर्व आदिवासी समाज और एसपी के साथ हुआ तीखी बहस

सर्व आदिवासी समाज अपने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर बालोद जिले कई स्थानों में चक्काजाम कर दिया गया है।वही जिला मुख्यालय के दल्ली तिराहा चौक के तीन स्थानों पर आदिवासी समाज की महिलाएं व पुरुष सड़क पर बैठ गए हैं । जिसके कारण उक्त जाम में दर्द से कराहते हुए डिलवरी के लिए जा रही महिला की गाड़ी की फंस गई।इस दौरान पीड़ित महिला के परिजन जाने के लिए आदिवासी के लोगो से रास्ते खोलने की निवेदन करते रहे लेकिन लोगो ने उक्त महिला की गाड़ी को जाने नही दिया गया।इस बीच पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार ऐसी तिराहे से होकर ऑफिस जा रहे थे। इस दौरान उनकी नजर पीड़ित महिला के ऊपर पड़ी।एसपी ने उक्त पीड़ित महिला की गाड़ी को जाने के लिए रास्ते देने को कहा गया तो आदिवासी समाज के लोग उत्तेजित होकर रास्ते नही खोलने की बात को लेकर एसपी के साथ तीखी बहस हो गई।काफी मशक्कत करने के बाद आदिवासी समाज के लोगो ने पीड़ित महिला की गाड़ी को जाने दिया।

जिला सत्र न्यायाधीश की गाड़ी को भी रोकवाये

सर्व आदिवासी समाज द्वारा आयोजित महाबंद में केवल आम लोग बल्कि जिला स्तर के प्रशासनिक पुलिस अधिकारियों के साथ साथ जिला सत्र न्यायाधीश की गाड़ी को भी समाज के लोगो ने आगे जाने से रोक दिया चक्काजाम का आम जनजीवन पर इस आंदोलन का खासा असर देखने देखने को मिला


चक्काजाम से परेशान हुए यात्री

सर्व आदिवासी समाज के लोगो द्वारा जिले के अलग अलग स्थानों में चक्काजाम कर दिया गया है।जिससे यात्री बसो को भी आने जाने नही दिया जा रहा है।इससे बसो के पहिए पूरी तरह से थम गई है।मार्ग में यात्री बसे नही चलने से लोगो को अपने आने गंतव्य की ओर आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।जिला मुख्यालय के शहीद वीरनारायण सिंह नया बस स्टैंड में यात्री अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए बसो के इंतजार में धंटो बैठे रहे लेकिन बसे नही आई यात्री थक हार कर मायूस होकर अपने धर लौट गए।


10 सूत्रीय मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज कर रहे चक्काजाम

सर्व आदिवासी समाज की मांग है कि सुकमा जिले के ग्राम सिलगेर में पुलिस के गोलीबारी से मृत आदिवासियों के परिजनों को 50 लाख रूपये, घायलों को 5 लाख रूपये और मृतकों के परिजनों को योग्यता अनुसार शासकीय नौकरी एवं सम्पूर्ण बस्तर में नक्सल समस्या का समाधान के लिए शासन स्तर पर पहल किया जाये, शासकीय नौकरी में बैकलाग और नईभर्तियों में रोस्टर आरक्षण लागू किया जाये, पांचवी अनुसूची क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में शत् प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाये, प्रदेश में खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह लीज में लेकर जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाया जाये , गौण खनिज का पूरा अधिकार ग्राम सभा को दिया जाये , फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर शीघ्र कार्यवाही हो , मात्रात्मक त्रुटि सुधार कर 19 जातियों को जातिप्रमाण पत्र जारी करें , छात्रवृत्ति योजना में आदिवासियों के लिए आय सीमा 2.50 लाख को समाप्त किया जाये , आदिवासी समाज की लड़की अन्य जाति समाज में शादी होने पर इनके नाम की जमीन जायदाद वापस किया जाये , आदिवासियों पर उत्पीड़न जमीन का हस्तांतरण , महिला एवं बच्चों पर अत्याचार , हत्या , जातिगत पर तत्काल कार्यवाही करने की मांग शामिल हैं।चक्काजाम के दौरान छग सर्व आदिवासी समाज की महिलाएं व पुरुष बड़ी सख्या में शामिल थे।

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