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सर्पदंश के बाद युवक युवक व उनके परिजन 6 घन्टे तक लगाते रहे बैगा के चक्कर…हालत बिगड़ी तो लाया गया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र…यहां भी नही बनी बात.. तो छत्तीसगढ़ के इस बड़े अस्पताल में में किया गया रेफर

बालोद- कई बार खुद की नासमझी खुद के जान के दुश्मन बन जाती है अक्सर देखा जाता है ग्रामीण इलाकों सर्पदंश के बाद ज्यादातर लोगों के जान जाने की बात सामने आती है जिसका प्रमुख कारण यही है कि सर्पदंश के बाद लोग सीधे अस्पताल जाने के बजाय झाड़फूंक व बैगाओं के चक्कर काटते नजर आते है जिससे काफी देर हो चुकी होती है कुछ ऐसा मामला फिर सामने आया है जिसमे युवक को सांप काटने के बाद युवक करीब 6 घंटे तक झाड़फूंक के चक्कर मे घूमता रहा लेकिन हालत खराब होने के बाद अस्तपाल का शरण लेना पड़ा हालांकि अस्पताल प्रबंधन के सजगता से युवक को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है
पूरा मामला गुंडरदेही ब्लाक के चंदनबीरही गांव का है जहाँ पर खेत मे काम करने गए 22 वर्षीय युवक को जहरीले सांप ने डस दिया, युवक को अस्पताल लेजाने के बजाए झाड़फूंक के चक्कर मे बिताए 6 घँटे युवक को भारी पड़ गया युवक को गंभीर हालत में लाटाबोड़ अस्पताल से बालोद जिला अस्पताल फिर राजनांदगांव अस्पताल रेफर किया गया जहाँ युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। युवक ललित साहू 22 वर्ष जिले के गुंडरदेही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम चंदन बिरही का रहने वाला है। जो रोज की तरह गुरुवार को भी सुबह अपने खेत मे काम करने गया था सुबह 9 बजे के करीब ललित जब अपने खेत मे काम कर रहा था तो उसी समय गहुआ नामक जहरीले सांप ने युवक के हाँथ को डस दिया इस दौरान खेत मे मौजूद परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे झाड़फूंक से ठीक हो जाने की बात कह कर बैगा के पास ले गए जहाँ 11 बजे से लेकर 5 बजे तक युवक का इलाज चला लेकिन अंत तक ठीक नही होने पर युवक को लाटाबोड़ अस्पताल लेजाया गया जहाँ से बालोद जिला अस्पताल में रेफर किया गया लेकिन जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों ने युवक की गम्भीर स्थिति को देखते हुए उसे राजनांदगांव रेफर किया डॉक्टरों ने कहा के सांप सुबह काटा है काफी देर से अस्पताल आने के कारण सांप का जहर युवक के पूरे शरीर मे फैलते जा रहा है। इसके बाद डॉक्टरों ने युवक को राजनांदगांव रेफर किया।
आपको बता दे कि मानसून लगते ही जहरीले जीव जंतु आवासीय क्षेत्र की ओर रुख करने लगे हैं,खास कर जहरीले सांप एवं बिच्छू घर तक पहुंच जाते है ऐसे में घर पर रहने वाले छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बना रहता है।हर साल मानसून मौसम में जिले से सांप तथा बिच्छू कांटने का मामला जिला अस्पताल पहुंचता है सर्पदंश से कई लोगो ने अपनी जान गंवा चुके है। बारिश के मौसम में जहरीले सांप के डसने से अधिकांश बच्चे एवं युवा वर्ग के लोग अपनी जान गंवा देते हैं। खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में खेत खलियान एवं घर के आसपास बाड़ी होने के कारण जहरीले सांप बिच्छु घर मे प्रवेश कर जाते है और लोगो को अपना शिकार बनाते हैं। ऐसे में लोगो को सावधानी बरतें की शक्त जरूरत है।

अंधविश्वास और झाड़फूंक के चलते गंवाते है जान

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखने और सुनने को मिलता है जब मानसून के दिनों में जहरीले सांप बच्चों य युवाओं को डस लेता है तो परिजनों द्वारा गांव में बैगा या मंदिरों में चक्कर लगाकर झाड़फूंक से ठीक करने की कोशिश करते हैं बीते कई दशकों से यह चली आ रही झाड़फूंक की यह सिलसिला आज भी इस आधुनिक युग मे ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखने को मिलता है सर्पदंश के बाद से ही झाड़फूंक का कार्य घंटो तक चलता है। अंधविश्वास एवं झाड़फूंक के चलते कइयों को जान गंवानी पड़ी है सांप डसने के तत्काल बाद मरीज को समय रहते अस्पताल लेजाने जान बचाने का मौका मिल जाता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग झाड़फूंक के कारण अस्पताल की ओर रुख नही करते जबकि झाड़फूंक करने में घण्टो समय बिताने के बाद तबियत बिगड़ने पर अस्पताल लेजाते हैं लेकिन देर होने के कारण डॉक्टर भी उन्हें नही बचा पाते, लोगो को झाड़फूंक एवं अंधविश्वास से दूर रहने तथा अस्पताल एवं डॉक्टरों की सलाह लेने का जागरूक करना बेहद जरूरी है।

एंटी स्नेक वेमन के 1120 डोस, जिले के लिए पर्याप्त, हर साल मंगाना पड़ता है यह डोस

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में जहरीले सांप के काटने पर मरीज को लगाए जाने वाले इंजेक्शन ( एंटी स्नेक रेमन ) का 1120 डोस स्टॉक है विभाग द्वारा कहना है कि यह जिले के लिए पर्याप्त है लेकिन मानसून लगने के कारण विभाग द्वारा यह इंजेक्शन और मंगाने की तैयारी है।

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