रिहाई के नाम पर मांगे पैसे, परिजनों ने दो किस्तों में भेजे 16 हजार रुपये; फिर भी घर नहीं लौटे पति, सुरक्षित वापसी के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहीं पत्नियां
बालोद। अच्छी तनख्वाह पर नौकरी मिलने की उम्मीद में घर से निकले दो मजदूरों के दूसरे राज्य में फंसने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बालोद जिले के ग्राम करहीभदर निवासी संपत चतुर्वेदी और राकेश खत्री को नागपुर की बिस्किट फैक्ट्री में काम दिलाने का झांसा देकर तमिलनाडु ले जाया गया, जहां उनसे कथित तौर पर बोर मशीन गाड़ी में जबरन मजदूरी कराई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि दोनों मजदूरों को अपनी मर्जी से कहीं आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। उन्हें घर भेजने के नाम पर पैसों की मांग भी की गई। भय और चिंता के बीच परिजनों ने फोन-पे के माध्यम से दो किस्तों में कुल 16 हजार रुपये भेजे, लेकिन इसके बाद भी दोनों की वापसी नहीं हो सकी।
अपने पतियों की सुरक्षित वापसी की आस में उनकी पत्नियां अब प्रशासन से गुहार लगा रही हैं। मामले की शिकायत कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बालोद कोतवाली थाने में की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद नौकरी के नाम पर दूसरे राज्य ले जाए जाने और मजदूरों से कथित जबरन काम कराए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागपुर में नौकरी का दिया भरोसा, फिर तमिलनाडु ले जाने का आरोप
मामला बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम करहीभदर का है। जानकारी के अनुसार, गांव के संपत चतुर्वेदी और राकेश खत्री 28 सितंबर को रोजगार की तलाश में घर से निकले थे। आरोप है कि गुरुर थाना क्षेत्र के ग्राम नंगझर निवासी चंद्रेश ठाकुर ने दोनों को नागपुर की एक बिस्किट फैक्ट्री में अच्छी तनख्वाह पर काम दिलाने का भरोसा दिया था।
नौकरी की उम्मीद में दोनों मजदूर अपने खर्च से ट्रेन का टिकट लेकर नागपुर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि नागपुर पहुंचने के बाद उन्हें तमिलनाडु ले जाया गया। अब स्थिति यह है कि परिवारों को उनके ठिकाने की स्पष्ट जानकारी तक नहीं है। उन्हें यह भी पता नहीं है कि तमिलनाडु में दोनों मजदूरों को किस स्थान पर रखा गया है और किन परिस्थितियों में उनसे काम कराया जा रहा है।
पांच दिन बाद भी नहीं लौटा पति, फोन पर बताई परेशानी
संपत चतुर्वेदी की पत्नी कौशल्या चतुर्वेदी ने बताया कि चंद्रेश ठाकुर का उनके घर आना-जाना था। इसी परिचय और विश्वास के चलते उनके पति उसके कहने पर काम करने के लिए तैयार हुए थे। 28 सितंबर को संपत यह कहकर घर से निकले थे कि वे नागपुर की बिस्किट फैक्ट्री में नौकरी करने जा रहे हैं। उन्होंने अपने पैसों से ट्रेन का टिकट बनवाया था और नागपुर पहुंचने के बाद फोन कर इसकी जानकारी भी दी थी।
कौशल्या के मुताबिक, उसी रात उनके पति को तमिलनाडु ले जाया गया। इसके बाद से परिवार उनकी स्थिति को लेकर परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि फोन पर पति ने बताया कि उन्हें अपनी मर्जी से कहीं आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और डांट-डपटकर जबरन काम कराया जा रहा है।
कौशल्या का कहना है कि पति की वापसी के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद अब तक कोई राहत नहीं मिली है। परिवार को आशंका है कि दूसरे राज्य में उनके पति को उनकी इच्छा के विरुद्ध रोका गया है।
दो किस्तों में भेजे 16 हजार रुपये, फिर भी नहीं हुई वापसी
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप मजदूरों को छोड़ने के नाम पर पैसों की मांग किए जाने का है। कौशल्या चतुर्वेदी के अनुसार, जिन लोगों के यहां उनके पति काम कर रहे हैं, उनकी ओर से पैसे मांगे गए थे। इसके बाद परिवार ने फोन-पे के माध्यम से दो बार रकम भेजी।
परिजनों के मुताबिक, रविवार रात 8 बजकर 2 मिनट पर आठ हजार रुपये और रात 8 बजकर 8 मिनट पर फिर आठ हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 16 हजार रुपये भेजे गए। परिवार को उम्मीद थी कि रकम भेजने के बाद उनके पति को छोड़ दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि पैसे नहीं देने पर मजदूरों को रिहा नहीं करने की धमकी दी गई। हालांकि, पैसों की मांग किसने की, रकम किस खाते में भेजी गई और इस लेनदेन के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या हैं, इन सभी पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पतियों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन से गुहार
अपने पतियों की स्थिति को लेकर चिंतित पद्मा बाई खत्री और कौशल्या चतुर्वेदी ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बालोद कोतवाली थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। परिवारों की मांग है कि दोनों मजदूरों का जल्द पता लगाया जाए, उन्हें कथित बंधन से मुक्त कराया जाए और सुरक्षित घर वापस लाया जाए।
परिजनों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें मजदूरों के मौजूदा ठिकाने की स्पष्ट जानकारी नहीं है। दूसरे राज्य में होने के कारण परिवार खुद वहां पहुंचकर उनकी स्थिति का पता लगाने में असमर्थ हैं। ऐसे में अब उनकी उम्मीद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

एएसपी बोले—शिकायत के आधार पर की जा रही जांच
मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना ने बताया कि 28 सितंबर को गुरुर थाना क्षेत्र के ग्राम नंगझर निवासी चंद्रेश ठाकुर द्वारा ग्राम करहीभदर निवासी संपत चतुर्वेदी और राकेश खत्री को काम दिलाने के बहाने तमिलनाडु ले जाने की शिकायत मिली है।
एएसपी के अनुसार, परिजनों ने शिकायत में बताया है कि दोनों से बोर मशीन गाड़ी में जबरदस्ती काम कराया जा रहा है और उन्हें घर वापस नहीं आने दिया जा रहा है। प्रारंभिक शिकायत और परिजनों के कथनों के आधार पर पैसों की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है।
अब सुरक्षित वापसी का इंतजार
नौकरी की तलाश में घर से निकले दो मजदूरों के दूसरे राज्य में फंसे होने और उन्हें छोड़ने के नाम पर रकम मांगे जाने के आरोप ने उनके परिवारों को चिंता में डाल दिया है। फिलहाल दोनों मजदूर तमिलनाडु में कहां हैं, उनकी वास्तविक परिस्थितियां क्या हैं और पैसों की मांग के आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह जांच का विषय है।













