
पहली घंटी के साथ लौट आया बचपन
सुबह 10 बजे विद्यालय की घंटी बजते ही मानो समय का पहिया कई दशक पीछे लौट गया। आयोजन समिति के प्रमुख जितेंद्र शर्मा ने सभी पूर्व विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। पंजीयन के बाद प्रतिभागियों को विशेष आईडी कार्ड प्रदान किए गए। विद्यालय के मुख्य द्वार पर स्वागत समिति ने तिलक और गुलाब का पुष्प देकर गुरुजनों एवं पूर्व विद्यार्थियों का स्वागत किया।
स्वल्पाहार के दौरान स्कूल के पुराने दिनों की यादें और गहरी हो गईं। विद्यालय के बाहर कभी पोहा-चना की दुकान लगाने वाले ‘महाराज’ के ठेले का स्वाद याद करते हुए पूर्व विद्यार्थियों ने पोहा-चना और जलेबी का आनंद लिया। हाथों में प्लेट और साथ में पुराने मित्र—किस्से वही पुराने थे, लेकिन चेहरे वर्षों बाद मिले थे।

‘ज्ञान की पाठशाला’ में गुरुजनों के चरणों में नमन
सुबह 11 बजे समारोह का मुख्य चरण ‘ज्ञान की पाठशाला’ शुरू हुआ। स्कूल बैंड की धुन और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वर्तमान एवं पूर्व शिक्षकों का मंच पर स्वागत किया गया। विभिन्न बैच के पूर्व विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए चरण वंदन किया।
शिक्षकों को कोसा की पारंपरिक शॉल, श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीफल और पर्यावरण संरक्षण एवं निरंतर विकास के प्रतीक पौधे भेंट किए गए। कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र शर्मा और विक्रम राजपूत ने किया।
जितेंद्र शर्मा ने कहा कि 1988 से 2000 तक के इतने लंबे कालखंड के विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना आसान नहीं था, लेकिन साथियों के प्रेम, सहयोग और समर्पण ने इस प्रयास को ऐतिहासिक बना दिया।
गुरुजनों के साथ समूह तस्वीरों और आत्मीय संवाद के दौरान कई ऐसे पल आए, जब वर्षों की दूरी मानो कुछ ही क्षणों में सिमट गई।
भोजन के साथ सांस्कृतिक रंग और ‘मस्ती की पाठशाला’
दोपहर 2:30 बजे भोजन के दौरान पूर्व विद्यार्थियों ने अपने पुराने शिक्षकों और सहपाठियों के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान विद्यालय के पूर्व छात्र और सांस्कृतिक दल ‘लहर गंगा’ के प्रमुख पुराणिक साहू एवं उनकी टीम ने सरप्राइज सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। गीत-संगीत से पूरा वातावरण उत्साह और उमंग से भर गया।
इसके बाद शुरू हुई ‘मस्ती की पाठशाला’, जिसमें ‘पहचान कौन’ सहित विभिन्न मनोरंजक खेल और गतिविधियां आयोजित की गईं। पुरानी कक्षा की शरारतों, शिक्षकों की नकल और बचपन के किस्सों ने सभी को जमकर हंसाया। कई प्रतिभागी उम्र की सीमाएं भूलकर फिर उसी दौर के विद्यार्थी बन गए।

श्रद्धांजलि सभा में नम हुईं आंखें
रियूनियन का सबसे भावुक क्षण श्रद्धांजलि सभा रहा। विद्यालय से जुड़े उन शिक्षकों और पूर्व छात्र-छात्राओं को याद किया गया, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। दिवंगत गुरुजनों और सहपाठियों के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर मौन रखा गया। जिन शिक्षकों ने कभी विद्यार्थियों का हाथ थामकर उन्हें जीवन की राह दिखाई थी और जिन सहपाठियों के साथ बचपन के अनगिनत पल साझा किए गए थे, उनकी स्मृतियों ने माहौल को भावुक कर दिया। श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सभी ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
दिवंगत शिक्षकगणों में स्व. जीपी पांडेय, स्व. टीआर महमल्ला, स्व. जीआर कोमिया, स्व. एनआर चंद्राकर, स्व. दौलत मैडम, स्व. गोदावरी नायक, स्व. आरडी हिरवानी, स्व. आर्य सर, स्व. भुआर्य सर, स्व. जोशी सर, स्व. एचएल साहू, स्व. घनश्याम साहू, स्व. जाऊलकर बाबू और स्व. डीआर साहू (PTI) को श्रद्धांजलि दी गई।
दिवंगत छात्र-छात्राओं में स्व. अनिल जॉन, स्व. जय किरी, स्व. विक्रम सिंह राजपूत, स्व. महेंद्र मढरिया, स्व. संतोष चंद्राकर, स्व. ईश्वर चंद्राकर, स्व. कुलेश्वर यादव, स्व. विष्णुशंकर पांडेय, स्व. कन्हैया वाधवानी, स्व. मानवेंद्र खत्री और स्व. नीता बघेल को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
प्राचार्य ने कहा—पूर्व विद्यार्थी विद्यालय की वास्तविक धरोहर
विद्यालय के वर्तमान प्राचार्य तपेश गौतम ने कहा कि यह आयोजन केवल पूर्व विद्यार्थियों का मिलन नहीं, बल्कि विद्यालय की परंपरा, संस्कार और गुरु-शिष्य संबंधों की जीवंत तस्वीर है। 1988 से 2000 तक के विद्यार्थियों को एक साथ विद्यालय परिसर में देखना पूरे विद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि पूर्व विद्यार्थी इस संस्था की वास्तविक धरोहर हैं। उनका अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और मातृ संस्था के प्रति जुड़ाव वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगा। शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कारों को जीवनभर जीवित रखने की यात्रा है।

मातृ संस्था को भेंट किया अत्याधुनिक वाटर कूलर
पूर्व विद्यार्थियों ने अपने विद्यालय के प्रति जिम्मेदारी और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरुर को एक बड़ा अत्याधुनिक वाटर कूलर भेंट किया। इसका उद्देश्य वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गर्मी और सामान्य दिनों में स्वच्छ एवं शीतल पेयजल उपलब्ध कराना है।
यह उपहार रियूनियन को केवल यादों तक सीमित न रखकर विद्यालय और वर्तमान पीढ़ी के प्रति पूर्व विद्यार्थियों की जिम्मेदारी से जोड़ने वाला प्रयास भी रहा।
अंतिम घंटी के साथ फिर बिछड़ गए साथी
शाम 5:30 बजे जब विद्यालय की अंतिम छुट्टी की घंटी बजी तो पूरे परिसर में एक बार फिर भावुक माहौल बन गया। वर्षों बाद मिले बचपन के साथी एक-दूसरे से गले मिले। कई आंखों में खुशी और बिछड़ने का दर्द एक साथ दिखाई दिया।
एक-दूसरे के संपर्क में रहने और जल्द फिर मिलने के वादों के साथ पूर्व विद्यार्थी अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। विद्यालय की अंतिम घंटी भले ही कार्यक्रम के समापन का संकेत थी, लेकिन इस मिलन ने तीन दशक पुरानी दोस्ती और गुरु-शिष्य संबंधों को फिर से जीवंत कर दिया।
आयोजन में इनका रहा योगदान
आयोजन समिति: जितेंद्र शर्मा, विक्रम राजपूत, द्वारिका भारद्वाज, उमेश साहू, सुनील जॉन एवं डॉ. पुष्पलता चंद्राकर।
विशेष सहयोग: सेवक साहू, हरीश टुवानी, प्रखर श्रीवास्तव, युगलकिशोर सेन, सादिक अली, कमल टावरी, जयंत किरी, गोपाल राठी, प्रदीप साहू, राकेश दीवान, डीएल साहू, पुरन अठनागर, उमाकांत कौशिक, पुराणिक साहू, चंद्रहास साहू, आशीष महल्ला, नागवंशी मैडम, डॉ. प्रेमिन साहू, कमलेश्वरी साहू सहित एनसीसी कैडेट्स का उल्लेखनीय योगदान रहा।
आशीर्वाद देने पहुंचे शिक्षक: तपेश गौतम, एनपी पांडे, पी पांडे, देशमुख, डॉ. प्रदीप शर्मा, बीआर साहू, टीके साहू, मोहन चतुर्वेदी, एनएस साहू, पंचागम, के. पतंगीवार, पौसार्य, कोमिया, केआर यादव, राजपुरिया, एनु राम सोनवानी, मूर्ति, एफआर कोशरिया, जीपी जोशी एवं ज्योति सहित अन्य शिक्षकगण।













