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विधायक के नाम का सहारा, मेडिकल कैंप की तैयारी और लाखों की दवाइयां! कोरगुड़ा में 4 लोगों पर पुलिस कार्रवाई

बालोद/डौंडीलोहारा। गांवों में स्वास्थ्य शिविर के नाम पर पहुंचने वाले निजी समूहों पर निगरानी की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। बालोद के ग्राम कोरगुड़ा में बिना वैध शासकीय अनुमति मेडिकल कैंप लगाने की तैयारी कर रहे चार लोगों को पुलिस ने पकड़ा है। मौके से बड़ी मात्रा में दवाइयां, हेल्थ एवं सप्लीमेंट्री प्रोडक्ट, लैपटॉप, प्रिंटर, वेट मशीन और Quantum Resonance Magnetic Analyzer सहित करीब 7.18 लाख रुपये की सामग्री जब्त की गई है।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस मेडिकल कैंप का प्रचार किया जा रहा था, उसके लिए लगाए गए फ्लेक्स में डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनिला भेड़िया के सहयोग से क्षेत्र में पहली बार कैंप आयोजित किए जाने का उल्लेख दिखाई दे रहा है। 


फ्लेक्स में बड़े-बड़े दावे, फीस महज 100 रुपये
मौके से सामने आए प्रचार फ्लेक्स में “Retro Humancare Foundation” का नाम प्रमुखता से दिया गया है। फ्लेक्स में कंप्यूटर के माध्यम से “संपूर्ण शरीर की जांच”, 100 बीमारियों की जांच, विभिन्न आंतरिक अंगों की जांच जैसे दावे किए गए हैं। साथ ही पंजीयन फीस 100 रुपये बताई गई है।
फ्लेक्स में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं की जांच का उल्लेख करते हुए लोगों को कैंप में आने के लिए आकर्षित किया गया है। इस तरह का प्रचार ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच कैंप को अधिक विश्वसनीय और अधिकृत समझने की धारणा पैदा कर सकता है।
विधायक के नाम का उल्लेख भरोसा बढ़ाने वाला पहलू
किसी जनप्रतिनिधि के सहयोग अथवा संरक्षण का उल्लेख किसी भी आयोजन को ग्रामीणों की नजर में अधिक विश्वसनीय बना सकता है। यही कारण है कि ऐसे प्रचार में जनप्रतिनिधि या संस्था का नाम देखकर ग्रामीण बिना ज्यादा पड़ताल किए कैंप तक पहुंच सकते हैं।
इस मामले में भी फ्लेक्स पर विधायक अनिला भेड़िया के सहयोग का उल्लेख होने से सवाल उठता है कि क्या आयोजकों के पास वास्तव में इस प्रकार का अधिकृत सहयोग या अनुमति थी? यह बिंदु जांच का विषय है। उपलब्ध पुलिस कार्रवाई में फिलहाल इतना सामने आया है कि मौके पर मौजूद चार व्यक्ति मेडिकल कैंप लगाने संबंधी वैध शासकीय अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सके।
मशीन से जांच और बीमारी के नाम पर उत्पादों की लंबी सूची
पुलिस द्वारा जब्त सामग्री में अलग-अलग बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के नाम वाले कई उत्पाद मिले हैं। इनमें Kidney Care, Piles Care, Thyroid Care, Liver Care, BP-Care, Diabo Care, Uric Acid Control, Heart CRE, Bone Health Care, Men’s Charge, Women’s Healthcare सहित अनेक उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही कैंप में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों में Quantum Resonance Magnetic Analyzer भी मिला है। पुलिस ने लैपटॉप और अन्य उपकरणों के साथ इसे भी जब्ती में लिया है।


यहीं से ग्रामीणों के लिए सावधानी का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है।किसी मशीन या कैंप में की गई जांच को डॉक्टर की जांच और प्रमाणित चिकित्सकीय निदान समझ लेना खतरनाक हो सकता है। बीमारी के नाम पर किसी उत्पाद को उपचार का विकल्प मानना या डॉक्टर की चल रही दवा बंद करना भी नुकसानदायक हो सकता है।
गांवों में ऐसे कैंप क्यों बन जाते हैं भरोसे का माध्यम?
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच कई बार सीमित होती है। ऐसे में यदि कोई संस्था आकर्षक फ्लेक्स, कम शुल्क, कंप्यूटराइज्ड जांच, बड़ी संख्या में बीमारियों की पहचान और किसी जनप्रतिनिधि के सहयोग का उल्लेख करते हुए कैंप लगाती है, तो आम व्यक्ति इसे स्वाभाविक रूप से विश्वसनीय और अधिकृत स्वास्थ्य सेवा मान सकता है।
यही भरोसा बाद में महंगे हेल्थ प्रोडक्ट या सप्लीमेंट खरीदने का आधार बन सकता है। इसलिए ग्रामीणों को किसी भी ऐसे कैंप में जाने से पहले आयोजक संस्था की वैधता, डॉक्टर की योग्यता, संबंधित विभाग की अनुमति और दी जा रही दवाओं/उत्पादों की वैधानिक स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।


पुलिस कार्रवाई ने उठाए कई सवाल
1 अक्टूबर को सूचना मिलने के बाद बालोद पुलिस ग्राम कोरगुड़ा पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक चार लोग मेडिकल कैंप की तैयारी करते मिले। अनुमति संबंधी दस्तावेज नहीं दिखाए जाने के बाद उन्हें वाहन और सामग्री सहित थाने लाया गया।
पुलिस ने वाहन CG 07 AQ 7352, बड़ी मात्रा में दवाइयां एवं हेल्थ प्रोडक्ट, लैपटॉप, प्रिंटर, वेट मशीन, Quantum Resonance Magnetic Analyzer समेत कुल ₹7,18,597 की सामग्री जब्त की है।


मामले में पुलिस द्वारा संबंधित अनुमति और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कैंप का वास्तविक उद्देश्य क्या था, आयोजकों के पास कौन-कौन से दस्तावेज थे और स्वास्थ्य जांच एवं उत्पादों के संबंध में किए जा रहे दावों की वैधानिक स्थिति क्या है।

सबसे बड़ा सवाल
अगर कैंप अधिकृत था तो अनुमति के दस्तावेज मौके पर क्यों नहीं थे? और अगर विधायक के सहयोग का दावा प्रचार फ्लेक्स में किया गया था, तो इसकी वास्तविकता क्या है? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के साथ-साथ संबंधित स्वास्थ्य विभाग और आयोजकों से भी सामने आना जरूरी है।

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