महाराष्ट्र में तीन अलग-अलग अभियानों में कार्रवाई, तेंदुए की खाल और दो जीवित पैंगोलिन भी बरामद
मुंबई। संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी के खिलाफ डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने महाराष्ट्र में लगातार तीन कार्रवाई कर तस्करी के प्रयासों का पर्दाफाश किया है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई इन कार्रवाइयों में हाथी दांत से बनी चार वस्तुएं, तेंदुए की खाल, दो जीवित पैंगोलिन, करीब 3 किलो बाघ की हड्डियां और बाघ के दो कैनाइन दांत बरामद किए गए। अलग-अलग अभियानों में कुल 11 लोगों को पकड़ा गया है।

DRI की पहली कार्रवाई में हाथी दांत की अवैध बिक्री की सूचना के आधार पर डिकॉय ऑपरेशन चलाया गया। अधिकारियों ने ग्राहक बनकर तस्करी में शामिल लोगों तक पहुंच बनाई। कार्रवाई के दौरान हाथी दांत से बनी चार वस्तुएं, जिनमें बारीक नक्काशी वाली वस्तुएं भी शामिल थीं, बरामद की गईं। इस मामले में तीन लोगों को पकड़ा गया। बरामद सामग्री और आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया।

तेंदुए की खाल के साथ दो पकड़े गए
29 सितंबर को DRI ने महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पुराडा गांव के समीप निगरानी के बाद दो संदिग्धों को रोका। तलाशी के दौरान उनके पास से तेंदुए की खाल बरामद हुई। प्रारंभिक जांच में खाल की तस्करी की आशंका सामने आई। तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में संरक्षित प्रजाति है। दोनों आरोपियों और जब्त खाल को आगे की कार्रवाई के लिए वन विभाग के देओरिया रेंज के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
अल्लापल्ली में संयुक्त कार्रवाई, पैंगोलिन और बाघ के अंग मिले
महाराष्ट्र के अल्लापल्ली वन क्षेत्र में 26 और 27 सितंबर को DRI ने वन विभाग, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), मुंबई और USTR एंटी-पोचिंग यूनिट के साथ संयुक्त अभियान चलाया। कार्रवाई में वन्यजीव तस्करी से जुड़े होने के संदेह में छह लोगों को पकड़ा गया।

अभियान के दौरान एक जीवित वयस्क पैंगोलिन और उसका बच्चा, करीब 3 किलो बाघ की हड्डियां तथा बाघ के दो कैनाइन दांत बरामद हुए। तलाशी के दौरान बाघ के अंगों के कथित अवैध शिकार, कब्जे, परिवहन और बिक्री की तैयारी से जुड़े साक्ष्य भी मिलने की बात सामने आई है। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पैंगोलिन, बाघ के अंगों के साथ तस्करी में इस्तेमाल की गई दो मोटरसाइकिलों को भी जब्त किया है।
संरक्षित प्रजातियों की तस्करी पर कार्रवाई तेज
अधिकारियों के अनुसार, इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हुआ है कि संरक्षित वन्यजीवों और उनके अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त के लिए अलग-अलग स्तर पर नेटवर्क सक्रिय हैं। DRI अब ऐसे मामलों में केवल अवैध सामग्री की बरामदगी तक सीमित न रहकर उसके स्रोत, परिवहन और संभावित खरीदारों तक पहुंचने पर भी फोकस कर रही है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत हाथी, तेंदुआ, बाघ और पैंगोलिन जैसी संरक्षित प्रजातियों के शिकार, अवैध कब्जे, परिवहन और व्यापार पर कड़े प्रावधान लागू हैं। तीनों मामलों में जब्त वन्यजीव और संबंधित सामग्री को आगे की जांच एवं कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया है।













