
यह निरीक्षण केवल औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि हाल की दो बड़ी घटनाओं—लैंडस्लाइड और छह मौतों वाले सड़क हादसे—के बाद सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी पड़ताल के रूप में देखा जा रहा है। एसपी ने दुर्घटनाओं वाले स्थलों पर पहुंचकर सड़क की बनावट, तीखे मोड़, ढलानों, दृश्यता, जल निकासी और सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया तथा संबंधित विभागों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

25 सितंबर का हादसा बना सुरक्षा समीक्षा का बड़ा कारण
पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर को कवर्धा से जगदलपुर जा रही स्वराज माज़दा (CG10 BU 7174) मरकाटोला घाट में खराब होकर सड़क किनारे खड़ी थी। वाहन में सवार दो लोग मैकेनिक लाने गए हुए थे। इसी दौरान सुबह करीब 11:30 बजे रायपुर से जगदलपुर जा रहे गेहूं से लदे 16 पहिया टाटा ट्रक (CG04 QY 5947) ने पीछे से माज़दा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि माज़दा कई मीटर तक घिसटती चली गई और ट्रक भी पलट गया। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हुई, जबकि उपचार के दौरान चार और लोगों ने दम तोड़ दिया। कुल छह लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद मरकाटोला घाट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

लैंडस्लाइड ने बढ़ाई चुनौती
हादसे से पहले हुई लगातार बारिश के दौरान मरकाटोला घाट की पहाड़ियों से मलबा और बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे थे। इससे यातायात बाधित हुआ और वाहन चालकों के लिए खतरा कई गुना बढ़ गया। पहाड़ी कटाव और कम दृश्यता के कारण यह घाट अब जिले के सबसे संवेदनशील सड़क खंडों में शामिल माना जा रहा है। पुलिस और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) दोनों ने माना है कि यहां स्थायी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
इन आठ संवेदनशील स्थानों का किया निरीक्षण
एसपी किरण चव्हाण ने निरीक्षण के दौरान मरकाटोला घाटी, राजाराव पठार, जगतरा टोल प्लाजा, बालोदगहन मोड़, ग्राम पुरूर दुर्गावती चौक, ग्राम चिटौद हनुमान मंदिर के पास, चिटौद हाउसिंग बोर्ड मोड़ और पुट्टू ढाबा के आसपास सड़क की स्थिति का जायजा लिया। प्रत्येक स्थान पर पूर्व में हुई दुर्घटनाओं के कारणों की जानकारी लेकर सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने के निर्देश दिए गए।
ब्लैक स्पॉट पर बदलेगी सुरक्षा की तस्वीर
निरीक्षण के दौरान एसपी ने रिफ्लेक्टिव रोड साइन, चेतावनी बोर्ड, स्टॉपर, कैट-आई, गति नियंत्रण संकेतक और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि घाटी क्षेत्र में चालक को खतरनाक मोड़ और ढलान की पूर्व सूचना मिलेगी तो वह समय रहते वाहन की गति नियंत्रित कर सकेगा।
घाटी में सोलर लाइट लगाने की तैयारी
मरकाटोला घाट में रात के समय कम दृश्यता को देखते हुए एसपी ने यहां सोलर लैंप लगाने का सुझाव दिया। इससे अंधेरे में सड़क और मोड़ स्पष्ट दिखाई देंगे तथा दुर्घटना की आशंका कम होगी। साथ ही सड़क किनारे चेतावनी संकेतकों को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सिर्फ सड़क नहीं, ड्राइविंग व्यवहार भी चिंता का विषय
सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात भी सामने आई कि घाटी क्षेत्र में तेज रफ्तार, भारी वाहनों का दबाव, बारिश के दौरान फिसलन और सीमित दृश्यता दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मार्गों पर केवल इंजीनियरिंग सुधार पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि गति नियंत्रण, ओवरलोडिंग पर निगरानी और लगातार प्रवर्तन भी उतना ही जरूरी है।
वाहन चालकों से सावधानी बरतने की अपील
पुलिस अधीक्षक ने वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने, ओवरलोडिंग से बचने, बारिश के दौरान घाटी क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी बरतने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने की कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए।
निरीक्षण के दौरान एसडीओपी गुरूर माया शर्मा, थाना प्रभारी पुरूर जन्मेजय पाण्डेय, यातायात प्रभारी नवीन बोरकर, NHAI के एसडीओ एस.के. द्विवेदी तथा सब-इंजीनियर राकेश नेताम भी मौजूद रहे।













