समाज के जिलाध्यक्ष संतोष कौशिक ने कहा कि 20 सितंबर को आयोजित व्यापमं की परीक्षा के प्रश्नपत्र में सेन नाई समाज की पहचान से संबंधित प्रश्न में ‘नाऊ’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि किसी समाज की पहचान से जुड़े शब्द को प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र में लाखों परीक्षार्थियों के सामने प्रस्तुत किए जाने से समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज की आपत्ति का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था अथवा सरकार पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सामाजिक पहचान से जुड़े शब्दों के चयन में संवेदनशीलता और सावधानी सुनिश्चित करना है। कौशिक ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित शब्द का वर्तमान सामाजिक संदर्भ में क्या प्रयोग और स्वीकार्यता है।

किस स्रोत के आधार पर शामिल किया गया शब्द?
सेन समाज ने प्रश्नपत्र में प्रयुक्त शब्द के स्रोत और संदर्भ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जिलाध्यक्ष कौशिक ने कहा कि प्रश्न तैयार करते समय क्या संबंधित शब्द का आधिकारिक स्तर पर परीक्षण या समीक्षा की गई थी और इसे किस स्रोत अथवा संदर्भ के आधार पर प्रश्न में शामिल किया गया, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए।
समाज ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मामले की गंभीरता से समीक्षा कर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर स्पष्टीकरण लेने की मांग की है। साथ ही समाज की आपत्ति का निराकरण करते हुए ऐसे शब्द को प्रश्नपत्र से हटाने की मांग की गई है, जिसे समाज अपनी सामाजिक पहचान के संदर्भ में आपत्तिजनक मान रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में सामाजिक संवेदनशीलता पर जोर
ज्ञापन के माध्यम से समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि देश और प्रदेश में विभिन्न जाति एवं समाज के लोग निवास करते हैं। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी समाज, जाति या समुदाय की पहचान से जुड़े शब्दों का उल्लेख करते समय सामाजिक संवेदनशीलता, संदर्भ और प्रचलित स्वीकार्यता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। समाज ने उम्मीद जताई कि शासन स्तर पर मामले की समीक्षा कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में जिला सेन समाज अध्यक्ष संतोष कौशिक, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता सेन, जिला पदाधिकारी संतोष श्रीवास, टुमन कौशिक, सेतु राम शांडिल्य, मोहन सेन, मुकेश भारद्वाज, छोटू कौशिक, द्वारिका शांडिल्य, कमल नारायण कौशिक, रूपेंद्र सेन, दिलीप कौशिक, सतीश श्रीवास, ढालेश्वर भारद्वाज, गजेंद्र कौशिक, जनक कौशिक, हुमन भारद्वाज सहित समाज के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।













