रायपुर। दल्लीराजहरा–रावघाट नई रेल लाइन परियोजना अब अपने महत्वपूर्ण अंतिम चरण में पहुंच गई है। परियोजना के तहत ताड़ोकी–रावघाट सिंगल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉडगेज सेक्शन का मंगलवार को रेल संरक्षा आयुक्त (CRS), दक्षिण पूर्व परिमंडल, कोलकाता सुमीत सिंघल ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के साथ रेलखंड पर गति परीक्षण भी किया गया।

रेल संरक्षा आयुक्त ने 22 सितंबर को सीआरएस स्पेशल ट्रेन से ताड़ोकी से रावघाट तक रेलखंड का निरीक्षण किया। इस दौरान रेल लाइन, पुल-पुलियों, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग तथा अन्य तकनीकी और संरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से परीक्षण किया गया। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत रेलखंड पर स्पीड ट्रायल भी संपन्न हुआ। निरीक्षण के दौरान दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) मुदित भटनागर, रायपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक दयानंद सहित रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कमीशनिंग की दिशा में अहम पड़ाव
रेल संरक्षा आयुक्त का निरीक्षण और गति परीक्षण किसी भी नई रेल लाइन को परिचालन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसके माध्यम से रेलखंड की संरक्षा, तकनीकी व्यवस्थाओं और परिचालन क्षमता का परीक्षण किया जाता है। आवश्यक मानकों की पूर्ति के बाद आगे की निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत रेलखंड को परिचालन के लिए कमीशन किया जाता है।
दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में शामिल रही है। वर्तमान में दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक रेल सेवा उपलब्ध है। अब ताड़ोकी–रावघाट सेक्शन का सीआरएस निरीक्षण पूरा होने के बाद परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार
ताड़ोकी से रावघाट तक रेल परिचालन शुरू होने से आसपास के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी को विस्तार मिलने की उम्मीद है। इससे लोगों को आवागमन का बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा। कृषि उत्पादों और स्थानीय व्यापारिक वस्तुओं के परिवहन में भी सुविधा मिल सकती है।

नई रेल कनेक्टिविटी से क्षेत्र के लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े केंद्रों तक पहुंच आसान होने के साथ पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।ताड़ोकी–रावघाट सेक्शन का सीआरएस निरीक्षण और स्पीड ट्रायल परियोजना की कमीशनिंग प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। अब निर्धारित संरक्षा मानकों और आवश्यक प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।













