बालोद। दीपावली का त्योहार खुशियों और रोशनी का प्रतीक है, लेकिन बालोद जिला मुख्यालय में पटाखों की बिक्री के लिए सजाया गया बाजार किसी बड़े खतरे की आशंका को लेकर चर्चा में है। शहर के सरदार पटेल मैदान में 50 से अधिक अस्थायी पटाखा दुकानें संचालित हो रही हैं। यहां दुकानों की कतारें एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। बांस और प्लास्टिक जैसी सामग्री से बने अस्थायी ढांचों में पटाखों की बिक्री की जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि पटाखा दुकानों की सुरक्षा को लेकर जिला अग्निशमन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और मौके पर नजर आ रही व्यवस्थाओं के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। दुकानों के बीच निर्धारित दूरी से लेकर पार्किंग और अग्निशमन व्यवस्था तक कई बिंदुओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर होगा?

अग्निशमन विभाग के निर्देश स्पष्ट, फिर भी पालन क्यों नहीं?
दरअसल, दीपावली के मद्देनजर जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी, नगर सेना जिला बालोद द्वारा 2 नवंबर 2026 को पटाखा दुकानों में अग्नि सुरक्षा के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसमें स्पष्ट किया गया था कि पटाखा दुकानों का निर्माण कपड़े, बांस, रस्सी, टेंट अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री से नहीं किया जाना चाहिए। दुकानों का निर्माण अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड में करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके साथ ही दो दुकानों के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी रखना अनिवार्य बताया गया था। दुकानें एक-दूसरे के आमने-सामने भी नहीं बनाई जानी चाहिए। लेकिन सरदार पटेल मैदान में संचालित पटाखा बाजार की स्थिति इन निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां एक ही कतार में 15 से अधिक दुकानें बेहद नजदीक लगाई गई हैं। दुकानों के बीच निर्धारित दूरी का पालन होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में एक दुकान में आग लगने की स्थिति में दूसरी दुकानों तक आग पहुंचने और पटाखों में विस्फोट होने का खतरा बढ़ सकता है।

पार्किंग प्रतिबंधित, फिर भी दुकानों के सामने वाहनों की आवाजाही
अग्निशमन विभाग ने अपने दिशा-निर्देशों में पटाखा दुकानों के सामने बाइक और कार की पार्किंग को प्रतिबंधित किया है। इसके पीछे स्पष्ट उद्देश्य यह है कि आपातकालीन स्थिति में लोगों की निकासी और अग्निशमन वाहनों की आवाजाही में किसी प्रकार की बाधा न आए। लेकिन पटाखा बाजार के आसपास पार्किंग और वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि दुकानों के सामने वाहन खड़े होते हैं और बाजार में भीड़ बढ़ती है तो आगजनी की स्थिति में दमकल वाहन को घटनास्थल तक पहुंचाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में विभागीय निर्देशों का वास्तविक पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
सुरक्षा के नाम पर छोटी टंकियां, अग्निशमन व्यवस्था कितनी प्रभावी?
विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पटाखा दुकान में 5 किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य है। इसके अलावा दुकानों के सामने निर्धारित अंतराल पर 500 लीटर क्षमता के पानी से भरे ड्रम और बाल्टियों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वहीं सरदार पटेल मैदान में सुरक्षा के नाम पर दिखाई देने वाली छोटी अग्निशमन टंकियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रत्येक दुकान में निर्धारित क्षमता का अग्निशामक यंत्र उपलब्ध है? क्या 500 लीटर क्षमता के पानी से भरे ड्रम निर्धारित स्थानों पर रखे गए हैं? क्या आपात स्थिति में इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए कोई प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना होगा।

आसपास मकान, सरकारी क्वार्टर और थोक व्यापारियों की दुकानें
पटाखा बाजार की संवेदनशीलता केवल दुकानों की संख्या और उनके बीच की दूरी तक सीमित नहीं है। सरदार पटेल मैदान के आसपास निजी मकान, शासकीय क्वार्टर और फुटकर एवं थोक व्यापारियों की दुकानें भी मौजूद हैं। यह शहर का व्यस्ततम और भीड़भाड़ वाला इलाका है, जहां दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
अग्निशमन विभाग ने पटाखा दुकानों से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन प्रतिबंधित किया है। साथ ही ट्रांसफार्मर के पास दुकानें नहीं लगाने और दुकानों के ऊपर से हाईटेंशन विद्युत लाइन नहीं गुजरने देने के निर्देश दिए हैं। विद्युत सुरक्षा, खुले तारों और मास्टर स्विच में फ्यूज अथवा सर्किट ब्रेकर की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। इन सभी बिंदुओं पर स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है।
पहले भी उठ चुकी है आपत्ति, यातायात विभाग ने लिखा था पत्र
गौरतलब है कि सरदार पटेल मैदान में पटाखा दुकानों के संचालन को लेकर स्थानीय नागरिक पहले भी शिकायत कर चुके हैं। पूर्व में बालोद यातायात विभाग द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र लिखकर इस स्थान पर पटाखा दुकानों का संचालन नहीं किए जाने के संबंध में भी ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है। इसके बावजूद उसी स्थान पर बड़ी संख्या में अस्थायी दुकानें संचालित होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
जब संबंधित विभाग ने पहले ही सुरक्षा और यातायात संबंधी चिंताओं को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, तब इस बार पटाखा बाजार के लिए स्थल का चयन किस आधार पर किया गया? क्या दुकानें लगाने से पहले अग्निशमन विभाग, नगर पालिका और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण हुआ तो नियमों के विपरीत नजर आ रही व्यवस्थाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
त्योहार की खुशियों पर भारी न पड़ जाए प्रशासनिक लापरवाही
पटाखों का कारोबार ज्वलनशील और विस्फोटक सामग्री से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां सुरक्षा के प्रत्येक नियम का पालन अनिवार्य होना चाहिए। एक छोटी सी चिंगारी भी कई दुकानों को अपनी चपेट में ले सकती है। आसपास आवासीय भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान होने के कारण नुकसान का दायरा और भी बड़ा हो सकता है। वहीं भीड़भाड़ के बीच भगदड़ की स्थिति पैदा होने की आशंका भी बनी रहेगी।
ऐसे में स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका, पुलिस और अग्निशमन विभाग को तत्काल संयुक्त निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए। नियमों के विपरीत संचालित दुकानों पर आवश्यक कार्रवाई के साथ दुकानों के बीच निर्धारित दूरी, अग्निशमन उपकरण, पानी के ड्रम, पार्किंग प्रतिबंध, विद्युत सुरक्षा और दमकल वाहनों के लिए रास्ता सुनिश्चित किया जाना चाहिए।













