
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जांच, दवा और उपचार की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। पार्टी ने मेडिकल कॉलेजों से लेकर जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस के मुताबिक प्रदेश के 10 मेडिकल कॉलेजों में स्वीकृत 2660 पदों में से 1290 पद रिक्त हैं। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी बड़ी संख्या में पद खाली होने का दावा करते हुए पार्टी ने सवाल उठाया कि पर्याप्त चिकित्सकीय अमले के अभाव में मरीजों को बेहतर उपचार कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है।
रायपुर के मेकाहारा और डीकेएस अस्पताल को लेकर भी कांग्रेस ने कई आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि कहीं जांच किट उपलब्ध नहीं है तो कहीं एक्स-रे फिल्म और पैथोलॉजी सामग्री की कमी सामने आती है। MRI और CT स्कैन जैसी जांच सुविधाओं को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता और कथित अमानक दवाओं की शिकायतों की जांच की मांग भी की गई है।
कांग्रेस ने स्वास्थ्य बजट के क्रियान्वयन, दवाओं की समय पर आपूर्ति और मोबाइल मेडिकल यूनिट के बजट में कथित कटौती को भी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली से जोड़ा है। H1N1 जैसी बीमारियों के बीच अस्पतालों में वेंटिलेटर, आइसोलेशन वार्ड और जरूरी दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी पार्टी ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
हालांकि स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर सरकार की ओर से इस विज्ञप्ति के साथ कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं रखी गई है।

CGPSC पर उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने की मांग
दूसरा बड़ा मुद्दा CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2025 को लेकर है। 265 पदों के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा के परिणाम में 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया था।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने साक्षात्कार प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के चयन को लेकर सवाल उठाते हुए उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि अभ्यर्थियों को उनकी कॉपियां और प्राप्त अंकों की जानकारी मिलने से वे मूल्यांकन को स्वयं समझ और संतुष्ट हो सकेंगे।
कांग्रेस ने 265 पदों के मुकाबले 1:3 के अनुपात से 795 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार की अपेक्षा का सवाल उठाते हुए कहा है कि 608 अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने के पीछे मूल्यांकन और न्यूनतम अर्हता की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
यह मांग ऐसे समय उठी है जब CGPSC की राज्य सेवा परीक्षा-2025 के साक्षात्कार को लेकर पहले से अभ्यर्थियों के बीच सवाल उठ रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में भी 608 अभ्यर्थियों के चयन और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों का उल्लेख हुआ है। कांग्रेस ने आयोग से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि साक्षात्कार स्थगित करने की जरूरत क्यों पड़ी, मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रक्रिया से होगा और नई तारीख कब घोषित की जाएगी।

भावनात्मक मुद्दों के बजाय जनसवालों पर बहस की मांग
तीसरे राजनीतिक मुद्दे में कांग्रेस ने भाजपा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता के नाम को राजनीतिक बहस में लाने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय का कहना है कि युवाओं के रोजगार, पेपर लीक, शिक्षा, महंगाई, स्वास्थ्य, किसानों और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बजाय राजनीतिक बहस को भावनात्मक दिशा दी जा रही है। कांग्रेस ने दावा किया कि उसके कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की माता का उल्लेख नहीं किया गया था और भाजपा ने स्वयं इस मुद्दे को बहस में लाया। पार्टी ने भाजपा से शिक्षा, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य और अन्य जनसरोकारों से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की है।
तीन मुद्दे, एक राजनीतिक संदेश
कांग्रेस के इन तीनों बयानों में अलग-अलग मुद्दे जरूर हैं, लेकिन राजनीतिक संदेश एक-दूसरे से जुड़े नजर आते हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था के जरिए कांग्रेस ने सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। CGPSC के जरिए युवाओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को केंद्र में रखा गया है, जबकि तीसरे मुद्दे में राजनीतिक बहस को जनसरोकारों की ओर मोड़ने की मांग की गई है। खास तौर पर PSC का मुद्दा युवाओं से सीधे जुड़ा है और स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा आम जनता से। ऐसे में कांग्रेस ने दोनों विषयों को सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए राजनीतिक हमला तेज किया है।
अब इन आरोपों पर सरकार और CGPSC की ओर से आने वाला जवाब महत्वपूर्ण होगा। स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठाए गए आंकड़ों और दवाओं संबंधी आरोपों पर विभागीय स्थिति स्पष्ट होना तथा PSC के मामले में मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया को लेकर आयोग की स्थिति सामने आना इस राजनीतिक बहस को आगे की दिशा देगा।













