रायपुर,। कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई गिरफ्तारी के विरोध में बुधवार को राजधानी रायपुर में कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन किया। नेताजी सुभाष स्टेडियम स्थित ईडी कार्यालय के सामने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धरना दिया तथा कार्यालय का घेराव कर कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने एक ओर जहां ईडी की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर इसे केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक अभियान के रूप में पेश करने की कोशिश की।
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कांग्रेस नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। बघेल ने ईडी को चेतावनी देते हुए कहा कि “भाजपा की चाटुकारिता करने वाली ईडी संभल जाये, सरकार बदलने वाली है।” उन्होंने कहा कि गलत कार्रवाई और विपक्ष के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले अधिकारियों को भविष्य में जवाब देना होगा।

ईडी की कार्रवाई को कांग्रेस ने बनाया राजनीतिक मुद्दा
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी इस समय कांग्रेस के लिए महज एक कानूनी कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि राजनीतिक संघर्ष का मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने के लिए की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने सड़क पर उतरकर अपनी राजनीतिक एकजुटता और संगठनात्मक ताकत दिखाने का प्रयास किया।
बघेल ने कहा कि रामगोपाल अग्रवाल के साथ पूरी कांग्रेस खड़ी है। उन्होंने ईडी से गलत कार्रवाई बंद करने की मांग करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की “उल्टी गिनती” शुरू हो चुकी है। उनके बयान में आगामी राजनीतिक संघर्ष की स्पष्ट झलक दिखाई दी, जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई को कांग्रेस अपने व्यापक राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बना रही है।
भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों से राज्य सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर कोयला, रेत और शराब कारोबार में कथित अवैध वसूली तथा शराब में ओवररेटिंग के आरोप भी लगाए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन मामलों में अनियमितताएं हो रही हैं तो ईडी कार्रवाई करने का साहस क्यों नहीं दिखाती।
हालांकि ये आरोप राजनीतिक मंच से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति में नहीं की गई है। बघेल ने भाजपा सरकार के नेताओं और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में कथित वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का भविष्य में हिसाब लिया जाएगा।
उन्होंने कुछ नेताओं पर व्यक्तिगत स्तर पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की कथित गतिविधियां किसी से छिपी नहीं हैं। इन आरोपों के जरिए बघेल ने ईडी की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के उस राजनीतिक तर्क को मजबूत करने की कोशिश की कि जांच एजेंसियों को विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष से जुड़े मामलों में भी समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।

युवा आंदोलन का जिक्र, कांग्रेस ने संघर्ष का दायरा बढ़ाया
बघेल ने अपने संबोधन में हाल के ‘जेन जी’ आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा अब सरकार के कथित अत्याचार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों से डरने वाले नहीं हैं।
यह बयान कांग्रेस की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। पार्टी जहां ईडी की कार्रवाई को लेकर अपने परंपरागत राजनीतिक समर्थकों को लामबंद कर रही है, वहीं युवा वर्ग के आंदोलनों को भी सरकार विरोधी व्यापक माहौल से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
प्रदर्शन में दिखी कांग्रेस की एकजुटता
धरने में पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेंद्र तिवारी, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, विधायक संगीता सिन्हा, विधायक हर्षित स्वामी बघेल, विधायक रामकुमार यादव, कुंवर सिंह निषाद, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन, ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेन्द्र पप्पू बंजारे सहित प्रदेश और जिला स्तर के अनेक नेता मौजूद रहे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, पूर्व विधायकों, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को पार्टी के बड़े शक्ति प्रदर्शन का रूप दिया। इससे यह संकेत भी गया कि रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के मुद्दे पर कांग्रेस संगठन इसे सीमित कानूनी मामला न मानकर व्यापक राजनीतिक संघर्ष के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
राजनीतिक संदेश साफ—जांच एजेंसियां बनाम विपक्ष की बहस तेज
रायपुर का यह प्रदर्शन केवल ईडी कार्यालय के घेराव तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए कांग्रेस ने तीन स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की—पहला, पार्टी अपने नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई का राजनीतिक प्रतिरोध करेगी; दूसरा, भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और कथित वसूली के आरोपों को लगातार राजनीतिक मुद्दा बनाया जाएगा; और तीसरा, संगठन को सड़क पर उतारकर आगामी राजनीतिक संघर्ष के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखा जाएगा।
वहीं, ईडी की कार्रवाई और उसके पीछे के कानूनी आधार पर अंतिम स्थिति जांच एजेंसी की कार्रवाई तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ कानूनी और जांच प्रक्रिया के स्तर पर भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
कुल मिलाकर, रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस का रायपुर प्रदर्शन विपक्ष और जांच एजेंसियों के बीच बढ़ते टकराव का नया राजनीतिक अध्याय बनकर सामने आया है। भूपेश बघेल के आक्रामक तेवरों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय इसे भाजपा सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक अभियान में बदलने की कोशिश करेगी।







