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बेटे के जन्मदिन पर भोज साहू ने दिया अनमोल उपहार, फलदार पौधा बन गया जीवनभर की निशानी

36 पौधे बेटे वृक्षांश के नाम, पहले जन्मदिन पर मेहमानों को बांटे थे 500 पौधे; आज कई पौधे बन चुके हैं विशाल वृक्ष

बालोद। जन्मदिन पर महंगे उपहार देने की परंपरा के बीच गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम देवरी द निवासी पर्यावरण प्रेमी एवं जल प्रहरी भोज साहू ने अपने बेटे वृक्षांश के जन्मदिन को प्रकृति के नाम कर एक प्रेरणादायी मिसाल पेश की है। उन्होंने बेटे को फलदार पौधा उपहार में दिया और अस्पताल परिसर में उसका रोपण कर जन्मदिन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ दिया।

भोज साहू का पर्यावरण के प्रति समर्पण किसी एक दिन या आयोजन तक सीमित नहीं है। वे अपने बेटे की उम्र के अनुरूप हर वर्ष उसके जन्मदिन पर पौधारोपण करने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संकल्प निभा रहे हैं। इसी संकल्प के तहत अब तक वे अपने बेटे वृक्षांश के नाम से 36 पौधे रोपित कर चुके हैं।

पहले जन्मदिन पर मेहमानों को दिए थे 500 पौधे

भोज साहू के पर्यावरणीय प्रयास की शुरुआत बेटे के प्रथम जन्मोत्सव से ही खास अंदाज में हुई थी। उस अवसर पर उन्होंने घर आए मेहमानों को उपहार के रूप में 500 पौधे दिए थे। मेहमान इन पौधों को अपने-अपने घर ले जाकर रोपित कर चुके हैं। भोज साहू के अनुसार, इनमें से कई पौधे आज बड़े होकर वृक्ष का रूप ले चुके हैं।

‘महंगा उपहार खत्म हो सकता है, पौधा पीढ़ियों तक देता है जीवन’

भोज साहू का मानना है कि जन्मदिन पर दिया गया कोई महंगा उपहार कुछ समय बाद खराब या खत्म हो सकता है, लेकिन एक पौधा समय के साथ वृक्ष बनकर वर्षों तक फल, छाया और स्वच्छ हवा देता है। यही सोच उन्हें हर शुभ अवसर को पौधारोपण से जोड़ने के लिए प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा, “बच्चे के जन्मदिन पर उसकी उम्र के बराबर पौधे लगाना केवल पौधारोपण नहीं है, बल्कि उसके भविष्य के साथ प्रकृति का भविष्य भी संवारना है।”

जन्मदिन मनाएं, पौधा लगाएं और उसे वृक्ष बनाएं

भोज साहू ने लोगों से अपील की कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ सहित अन्य शुभ अवसरों पर महंगे उपहारों की जगह पौधे उपहार में दें और उनका रोपण करें। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे नियमित पानी, सुरक्षा और देखभाल देकर वृक्ष बनाना हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है।

भोज साहू का यह अनूठा संकल्प न केवल बेटे के जन्मदिन को यादगार बना रहा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रहा है कि एक छोटा सा पर्यावरणीय संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी विरासत बन सकता है।

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