Skip to main content

प्रदेश रूचि

आधी रात में दुकान ध्वस्त करने का आरोप: कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल, तहसीलदार के फैसले के बाद निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांगडौंडीलोहारा में 25 अगस्त को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का प्रस्तावित दौरा, 5 हजार महिलाओं के सम्मान की तैयारीखेल प्रतिभाओं को सरकार का बड़ा तोहफा: 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मिली शासकीय सेवा में नियुक्ति, बालोद के खिलाड़ियों ने भी बढ़ाया जिले का मानबालोद आबकारी विभाग में बड़ी कार्रवाई: उप निरीक्षक आशा राम शाक्य निलंबित, सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलोफर जैन पर विभागीय कार्रवाई का प्रस्तावजगतरा में बनेगी नई कृषि उपज मंडी, कलेक्टर ने स्थल निरीक्षण कर यातायात, पार्किंग और सुगम आवागमन के दिए अहम निर्देश

आधी रात में दुकान ध्वस्त करने का आरोप: कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल, तहसीलदार के फैसले के बाद निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

बालोद । राष्ट्रीय राजमार्ग-930 स्थित गंजपारा में वर्षों पुरानी दुकान को आधी रात जेसीबी से ध्वस्त किए जाने का मामला अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित पक्ष के प्रतिनिधि टंडन लाल कावरे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि माननीय न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किए बिना उनकी दुकान को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, 09 जुलाई 2026 की रात लगभग 2:00 से 2:30 बजे के बीच गंजपारा स्थित उनकी वर्षों पुरानी दुकान को जेसीबी एवं अन्य साधनों की सहायता से तोड़ दिया गया। परिवार का कहना है कि यह दुकान वर्ष 1985 से उनकी आजीविका का मुख्य आधार रही है और इस घटना से उन्हें भारी आर्थिक एवं मानसिक क्षति पहुंची है।

सिविल न्यायालय ने तय की थी विधिक प्रक्रिया

टंडन लाल कावरे ने बताया कि माननीय व्यवहार न्यायाधीश, वरिष्ठ श्रेणी, बालोद द्वारा सिविल वाद क्रमांक 32-ए/2017 में पारित निर्णय में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि विवादित भूमि का रिक्त कब्जा केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Due Process of Law) के अनुसार ही प्राप्त किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा था कि कब्जा प्राप्त करने से पहले वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप उचित क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा, क्योंकि न्यायालय ने प्रतिवादी के कब्जे को अवैध नहीं माना था।
तहसीलदार के आदेश में भी न्यायालय के आदेश का उल्लेख
दुकान ध्वस्त होने के बाद विवादित भूमि पर कथित निर्माण कार्य रोकने के लिए तहसीलदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया। प्रकरण में पटवारी की जांच रिपोर्ट, दोनों पक्षों के दस्तावेज एवं जवाबों का परीक्षण करने के बाद तहसीलदार ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि संबंधित भूमि के संबंध में सिविल न्यायालय पहले ही निर्णय दे चुका है। आदेश में यह भी कहा गया कि न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं निर्देशों के पालन के अभाव में राजस्व न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। इसी आधार पर पूर्व में जारी स्थगन आदेश समाप्त करते हुए आवेदन निरस्त कर दिया गया।

पटवारी जांच में सामने आए तथ्य

तहसीलदार न्यायालय में प्रस्तुत हल्का पटवारी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि निरीक्षण के दौरान पुरानी दुकान टूटी हुई मिली तथा मौके पर निर्माण सामग्री रखी हुई थी। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि भूमि एवं कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच पूर्व से विवाद चला आ रहा है।

पुलिस जांच की गति पर भी उठाए सवाल

पीड़ित पक्ष के प्रतिनिधि टंडन लाल कावरे का कहना है कि घटना की शिकायत, न्यायालय के आदेश एवं अन्य दस्तावेज पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद अब तक दोषियों की पहचान, जेसीबी एवं अन्य वाहनों की जब्ती, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के संकलन में अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि कुछ लोग पुलिस कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि यह पीड़ित पक्ष का आरोप है और इसकी पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।

यह केवल दुकान का नहीं, कानून के शासन का भी मामला’

टंडन लाल कावरे ने कहा कि यह मामला केवल एक दुकान तोड़े जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की गरिमा, कानून के शासन और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। यदि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर कोई भी व्यक्ति स्वयं कानून हाथ में लेकर संपत्ति ध्वस्त करता है तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के समक्ष रखीं ये प्रमुख मांगें

प्रेस विज्ञप्ति में पीड़ित पक्ष के प्रतिनिधि टंडन लाल कावरे ने कहा कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इससे न्यायालय के आदेशों की गरिमा और कानून के शासन पर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे। उन्होंने प्रशासन एवं पुलिस से मांग की कि घटना में शामिल सभी व्यक्तियों की शीघ्र पहचान कर पहले से दर्ज एफआईआर के आधार पर उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का अवसर न मिले।

उन्होंने मांग की कि घटना में प्रयुक्त जेसीबी एवं अन्य सभी वाहनों को तत्काल जब्त कर उनका वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए तथा यह पता लगाया जाए कि घटना में किन-किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही घटना स्थल और आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज, संबंधित व्यक्तियों की मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तथा अन्य डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कर विवेचना का हिस्सा बनाया जाए, जिससे जांच पूरी तरह तथ्यपरक और पारदर्शी हो सके।

टंडन लाल कावरे ने यह भी मांग की कि वर्षों से दुकान के माध्यम से जीवन-यापन कर रहे परिवार को हुई आर्थिक एवं मानसिक क्षति का स्वतंत्र और निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए तथा न्यायालय के निर्देशों और विधिक प्रावधानों के अनुरूप उचित क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।

पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा कि विवेचना के दौरान किसी भी दोषी व्यक्ति को किसी प्रकार का संरक्षण या राजनीतिक अथवा प्रशासनिक प्रभाव का लाभ नहीं मिलना चाहिए। जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए तथा जो भी व्यक्ति कानून के उल्लंघन का दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी मांग की गई है कि इस पूरे मामले में न्यायालय द्वारा निर्धारित विधिक प्रक्रिया का सम्मान सुनिश्चित किया जाए और भविष्य में कोई भी व्यक्ति न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर बलपूर्वक कार्रवाई करने का प्रयास न कर सके। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कानून के शासन की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए इस मामले में निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

निष्पक्ष कार्रवाई की जताई उम्मीद
प्रेस विज्ञप्ति के अंत में टंडन लाल कावरे ने विश्वास व्यक्त किया कि जिला पुलिस एवं प्रशासन न्यायालय के आदेशों की गरिमा बनाए रखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा तथा जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!