Skip to main content

प्रदेश रूचि

जब कलेक्टर ने खोले सपनों के दरवाजे: ‘द कलेक्टर्स-15’ बना मेधावी विद्यार्थियों के भविष्य का नया मंच

कोरिया। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि युवाओं को जीवन की वास्तविक चुनौतियों और अवसरों से भी जोड़ सके—इसी सोच को साकार करते हुए कोरिया जिले में एक प्रेरक और अभिनव पहल की शुरुआत हुई है। कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने जिले के मेधावी विद्यार्थियों के लिए ‘द कलेक्टर्स-15’ कार्यक्रम का शुभारंभ कर प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद की ऐसी नई परंपरा शुरू की है, जिसे शिक्षा और प्रशासन के समन्वय का एक प्रभावी मॉडल माना जा रहा है।

इस पहल की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि पहली बार कोरिया कलेक्टर निवास के द्वार मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए खोले गए। औपचारिक बैठकों के बजाय आत्मीय वातावरण में हुए इस संवाद ने विद्यार्थियों को न केवल अपने सपने साझा करने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें प्रशासन के सर्वोच्च जिला अधिकारी से सीधे प्रेरणा और मार्गदर्शन भी मिला।

आकांक्षी विकासखंड बैकुंठपुर के सहयोग से चयनित 15 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने कलेक्टर के साथ खुलकर अपने करियर लक्ष्य, संघर्ष, जिज्ञासाएं और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान वातावरण किसी सरकारी कार्यक्रम से अधिक एक प्रेरणादायी मार्गदर्शन सत्र जैसा दिखाई दिया, जहां हर विद्यार्थी की बात को गंभीरता से सुना गया और उसकी आकांक्षाओं को नई दिशा देने का प्रयास किया गया।

‘चुनौतियां ही सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी हैं’

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कहा कि प्रत्येक सपना महत्वपूर्ण होता है और उसे साकार करने के लिए मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास तथा सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़ी सोच रखने, निरंतर सीखते रहने और कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि जो लोग चुनौतियों से डरने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लेते हैं, वही जीवन में उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और सही निर्णय लेने की योग्यता विकसित करना भी है।

करियर से लेकर व्यक्तित्व विकास तक हर विषय पर खुली चर्चा

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने प्रशासनिक सेवाओं, उच्च शिक्षा, तकनीकी क्षेत्र, नवाचार, समय प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। कलेक्टर ने अपने अनुभव साझा करते हुए लक्ष्य निर्धारण, नियमित अध्ययन, धैर्य और असफलताओं से सीख लेने के महत्व को विस्तार से समझाया।

इस संवाद ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार किया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि यदि संकल्प मजबूत हो और मार्गदर्शन सही मिले तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

कक्षा से बाहर सीखने की नई संस्कृति

‘द कलेक्टर्स-15’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा की पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर युवाओं को वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशासनिक व्यवस्था के निकट लाना, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करना तथा समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना है।

यह पहल इस सोच को भी मजबूत करती है कि प्रशासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित न रहकर समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का सक्रिय माध्यम भी बन सकता है। जब प्रशासन स्वयं युवाओं के सपनों का सहभागी बनता है, तब सकारात्मक बदलाव की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं।

कोरिया के लिए प्रेरणादायी मॉडल

‘द कलेक्टर्स-15’ ने यह संदेश दिया है कि यदि प्रतिभाओं को समय पर सही मार्गदर्शन, प्रेरणा और अवसर उपलब्ध कराया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं, बल्कि जिले, राज्य और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शिक्षा, प्रशासन और युवाओं के बीच विश्वास का यह नया सेतु आने वाले समय में कोरिया जिले के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!