बालोद। किसानों को गुणवत्तापूर्ण और मानक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने कृषि आदान विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। खरीफ सीजन के दौरान कीटनाशी विक्रय केंद्रों की जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद जिले के छह कृषि केंद्रों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं, जबकि एक केंद्र का लाइसेंस निलंबित किया गया है।

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा जिलेभर में कीटनाशी विक्रय केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान कीटनाशी अधिनियम, 1968 और नियम 1971 के प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इन छह केंद्रों पर गिरी गाज
कृषि विभाग की कार्रवाई के तहत डौंडी विकासखंड के ग्राम चिखली स्थित पूर्णानंद कृषि केंद्र, गुंडरदेही के ग्राम मोहंदीपाट स्थित ठाकुर कृषि केंद्र, ग्राम राहुद स्थित जय किसान कृषि केंद्र, डौंडीलोहारा के ग्राम सोरली स्थित जलेश्वर कृषि केंद्र, गुरूर के ग्राम सोरर स्थित ठाकुरदेव कृषि केंद्र और बालोद विकासखंड के ग्राम निपानी स्थित चन्द्राकर कृषि केंद्र के कीटनाशी लाइसेंस निरस्त किए गए हैं।
वहीं गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम अर्जुन्दा स्थित संतोषी कृषि केंद्र का लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की गई है।

165 केंद्रों की जांच, 18 पर बिक्री प्रतिबंध
जिले में अब तक 165 कृषि केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच के दौरान अनियमितताएं मिलने पर 18 केंद्रों में कृषि सामग्री की बिक्री प्रतिबंधित की गई है। इसके अलावा 85 केंद्र संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। अब तक एक लाइसेंस निलंबित और नौ लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं।
कृषि विभाग की इस कार्रवाई से कृषि आदान विक्रेताओं में भी हड़कंप की स्थिति है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्ताहीन या मानकविहीन कीटनाशी उपलब्ध कराने अथवा निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

किसानों से पक्का बिल लेने की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे कीटनाशी और अन्य कृषि सामग्री केवल अधिकृत एवं विश्वसनीय विक्रेताओं से ही खरीदें। खरीदी के दौरान पक्का बिल अवश्य लें, ताकि किसी तरह की शिकायत या गुणवत्ता संबंधी समस्या सामने आने पर संबंधित विक्रेता की जवाबदेही तय की जा सके।
विभाग ने कृषि केंद्र संचालकों को भी कीटनाशी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए व्यवसाय संचालित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना प्राथमिकता है तथा नियमों की अनदेखी करने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।













