जिला प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 200 प्रतिभागियों का चयन कर उन्हें पूरी तरह निःशुल्क, परिणामोन्मुख और आधुनिक पद्धति से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इसमें अनुसूचित जनजाति के 80, अनुसूचित जाति के 40, अन्य पिछड़ा वर्ग के 40 तथा सामान्य वर्ग के 40 अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञ शिक्षकों की देखरेख में दो बैचों में संचालित होने वाली इस कोचिंग में नियमित कक्षाएं, साप्ताहिक टेस्ट, अध्ययन सामग्री, करियर काउंसलिंग, प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन और व्यक्तिगत मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
योजना के संचालन के लिए 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। चयनित कोचिंग संस्था को अनुभवी फैकल्टी, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, नियमित टेस्ट श्रृंखला तथा परिणाम आधारित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। कोचिंग संस्थाओं का चयन तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन की पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, ताकि जिले के युवाओं को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण मिल सके और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
निविदा प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। आवेदन की अंतिम तिथि 11 अगस्त निर्धारित की गई है, जबकि तकनीकी एवं वित्तीय प्रस्तावों का परीक्षण 18 अगस्त को किया जाएगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोचिंग कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिससे जिले के युवाओं को बिना बड़े शहरों का रुख किए उच्चस्तरीय मार्गदर्शन उपलब्ध हो सके।

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन का प्रयास है कि बालोद का कोई भी प्रतिभाशाली युवा केवल संसाधनों के अभाव में अपने लक्ष्य से पीछे न रह जाए। जिले में गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है, ताकि अधिक से अधिक युवा शासकीय सेवाओं में चयनित होकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करें।
रोजगार की दिशा में नई उम्मीद
अब तक प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए जिले के अधिकांश विद्यार्थियों को रायपुर, दुर्ग या अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की व्यवस्था कर युवाओं के समय और खर्च दोनों की बचत करेगी। इससे जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बेहतर वातावरण तैयार होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल केवल एक कोचिंग योजना नहीं, बल्कि बालोद के युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने का एक ठोस प्रयास है। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में बालोद जिले से बड़ी संख्या में युवा CGPSC, व्यापम, SSC, बैंकिंग और रेलवे जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकेंगे। शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में यह पहल बालोद जिले के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।




















