जिला पंचायत की सामान्य सभा में सत्ता-विपक्ष एकजुट, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
बालोद। जिला पंचायत बालोद की सामान्य सभा की बैठक इस बार सामान्य प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर गंभीर बहस का मंच बन गई। बैठक में जहां कांग्रेस समर्थित विधायक संगीता सिन्हा और कुंवर सिंह निषाद ने विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने भी अधिकारियों की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जताई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों ने बैठक को पूरी तरह हंगामेदार बना दिया।
बैठक के दौरान संजारी-बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने कुछ माह पूर्व जिले में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के तहत पहले से विवाहित सहित कई जोड़ों का भी विवाह कराया गया, जिससे योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
इसके अलावा जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर स्कूल भवनों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने तथा कई स्थानों पर तालाबंदी जैसी स्थितियों को भी गंभीर विषय बताते हुए शासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था में लापरवाही भविष्य की पीढ़ी के साथ अन्याय है।
गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिले में आयोजित कई शासकीय कार्यक्रमों और विकास कार्यों की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि राज्य शासन से स्वीकृत कई विकास कार्यों की एजेंसियां भी स्थानीय प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना तय कर दी जाती हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होती है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और भविष्य में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से चर्चित पहलू जिला पंचायत अध्यक्ष तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर का रुख रहा। उन्होंने भी अधिकारियों पर आरोप लगाया कि जिला पंचायत को विकास कार्यों की पूरी जानकारी नहीं दी जाती और कई कार्यों के क्रियान्वयन में मनमानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रक्रिया की जांच के लिए जिला पंचायत सदस्यों की एक समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही राज्य शासन एवं जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से होने वाले निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग के माध्यम से कराए जाने की मांग भी की।
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बैठक में कई जिला पंचायत सदस्यों ने भी विभिन्न विभागों की कार्यशैली, योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। कई सदस्यों ने कहा कि यदि विकास योजनाओं की जानकारी समय पर जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाए और उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए, तो योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।
बालोद जिला पंचायत की यह सामान्य सभा केवल प्रशासनिक समीक्षा की बैठक नहीं रही, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी का संकेत भी बनकर सामने आई। आमतौर पर ऐसी बैठकों में विपक्ष ही अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, लेकिन इस बार सत्ता पक्ष से जुड़े जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा भी खुले मंच से अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए जाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक का दूसरा बड़ा संदेश यह रहा कि विकास कार्यों, शासकीय योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर असंतोष अब केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है। जब सत्ता और विपक्ष दोनों एक ही मुद्दे पर प्रशासन से जवाब मांगते दिखाई दें, तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता का संकेत माना जाता है।
जिला पंचायत के सामान्य सभा बैठक में शामिल अन्य सदस्यों ने भी कहा यदि बैठक में उठाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई की जाती है, तो इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है। वहीं यदि इन मुद्दों को केवल बैठक की कार्यवाही तक सीमित रखा गया, तो आने वाले समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल जिला पंचायत की इस सामान्य सभा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बालोद जिले में विकास कार्यों के क्रियान्वयन, योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में उठे गंभीर मुद्दों पर जिम्मेदारों द्वारा किस प्रकार की कार्रवाई करते हैं।




















