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बालोद में मानसून की बेरुखी से बढ़ी किसानों की चिंता, औसत से 80% कम बारिश; दोबारा बुआई का खतरा

 

बालोद। आषाढ़ मास की शुरुआत के साथ किसानों को अच्छी बारिश की उम्मीद थी, लेकिन जिले में अब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। पिछले दो दिनों से आसमान में काले बादल छाने और मौसम विभाग द्वारा गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना जताए जाने के बावजूद जिले के अधिकांश हिस्सों में संतोषजनक वर्षा नहीं हुई। ऐसे में खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित होने लगी हैं और किसान खेतों के साथ-साथ आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहें लगाए बैठे हैं।

समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने का सबसे अधिक असर धान की बोनी पर पड़ रहा है। जिले में अब तक लगभग 25,500 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की जा चुकी है, लेकिन पर्याप्त नमी के अभाव में कई स्थानों पर बीजों का अंकुरण प्रभावित हुआ है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो 15 से 20 दिन पहले बोनी करने वाले किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।

लगातार कम बारिश और उमस भरी गर्मी के कारण अंकुरित पौधों की बढ़वार भी रुक गई है। खेतों में नमी की कमी के चलते फसल की शुरुआती अवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कई किसान फिलहाल आगे की बोनी रोककर अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं।

जिला भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार 1 से 30 जून के बीच बालोद जिले में औसतन 58.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत कम है। वहीं पिछले दस वर्षों के औसत के अनुसार जून माह के अंत तक जिले में करीब 202 मिमी वर्षा हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार बारिश सामान्य से काफी कम रही। यही वजह है कि अधिकांश कृषि भूमि में अभी तक पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है और कई खेत बोनी के लिए तैयार नहीं हो सके हैं।

विकासखंडवार वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो डौण्डी में सर्वाधिक 80.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद गुण्डरदेही में 79.8 मिमी, गुरूर में 64.1 मिमी, अर्जुन्दा में 63.5 मिमी, बालोद में 43.6 मिमी, जबकि देवरी और डौण्डीलोहारा में केवल 24-24 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की फुहारें ही पड़ी हैं, जो खेतों में पर्याप्त नमी बनाने के लिए नाकाफी साबित हुई हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि मानसून रफ्तार पकड़ता है तो खरीफ सीजन को संभाला जा सकता है। हालांकि बारिश में और देरी होने की स्थिति में बोनी का रकबा प्रभावित होने के साथ-साथ उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल जिले का किसान अच्छी बारिश की आस लगाए मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने का इंतजार कर रहा है।

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