बालोद। छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग ने गौण खनिज नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन के मामलों में जुर्माने तथा अन्य प्रावधानों को और अधिक सख्त कर दिया है। राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू किए गए इन संशोधित नियमों का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण, राजस्व में वृद्धि तथा खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं पारदर्शी प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।
जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि संशोधित नियमों के अनुसार अब अवैध उत्खनन एवं भंडारण के मामलों में यदि संबंधित व्यक्ति अपराध का प्रशमन (समझौता) कर प्रकरण समाप्त कराना चाहता है, तो उसे किसी भी स्थिति में न्यूनतम 25 हजार रुपये की प्रशमन राशि जमा करनी होगी। इससे कम राशि पर किसी भी मामले का निपटारा नहीं किया जाएगा।
इसी प्रकार अवैध खनिज परिवहन के मामलों में भी नियमों को अधिक कड़ा बनाया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित खनिज की मात्रा के आधार पर खनिज अधिनियम की धारा 21(5) के अंतर्गत देय राशि के अतिरिक्त धारा 23 के तहत प्रति टन दो हजार रुपये की दर से प्रशमन राशि देनी होगी। हालांकि, किसी भी स्थिति में यह राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी।
जब्त वाहनों की सुपुर्दगी के लिए सुरक्षा राशि अनिवार्य
संशोधित नियमों के तहत अवैध उत्खनन, परिवहन अथवा भंडारण में जब्त किए गए वाहन, मशीन, खनिज अथवा अन्य सामग्री को सुपुर्दगी पर देने से पहले संबंधित सक्षम न्यायालय के अंतिम निर्णय तक वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करानी होगी। यह राशि नियम 46(क) के तहत निर्धारित सुरक्षा जमा मद में जमा होने के बाद ही वाहन सुपुर्द किया जा सकेगा।
शासकीय निर्माण कार्यों के लिए मिली अतिरिक्त सुविधा
शासन ने शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन अनुज्ञापत्र से जुड़े नियमों में भी राहत प्रदान की है। अब अनुज्ञापत्र के लिए अधिकतम क्षेत्रफल 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दिया गया है। वहीं अनुज्ञापत्र की वैधता अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है, जिससे सरकारी निर्माण कार्यों में आवश्यक खनिजों की उपलब्धता बेहतर ढंग से सुनिश्चित हो सकेगी।
खनिज अन्वेषण न्यास में जमा होगी रॉयल्टी का 2 प्रतिशत
खनिज संसाधनों के अन्वेषण, व्यवस्थित विकास तथा आधारभूत संरचना के विस्तार के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना 12 सितंबर 2025 को की गई थी। नए प्रावधानों के अनुसार गौण खनिज पट्टों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा कराया जाएगा।
पट्टों के समामेलन के नियमों में भी बदलाव
विभिन्न प्रकार के खनिज पट्टों के समामेलन में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं। अब यदि किसी समामेलित पट्टे का संबंध ई-नीलामी, निविदा अथवा प्रीमियम आधारित स्वीकृति से है, तो समामेलन के बाद संबंधित पट्टाधारी को रॉयल्टी, जिला खनिज न्यास (DMF), राज्य खनिज अन्वेषण न्यास (SMET), नीलामी राशि तथा प्रीमियम राशि का भुगतान करना होगा। निर्धारित राशि के भुगतान की सहमति मिलने पर संचालक द्वारा पट्टों के समामेलन की अनुमति दी जाएगी।
रॉयल्टी कटौती और क्लीयरेंस प्रक्रिया में आएगी एकरूपता
राज्य के विभिन्न निर्माण विभागों में रॉयल्टी कटौती एवं रॉयल्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को भी अधिक स्पष्ट और एकरूप बनाया गया है। संशोधित नियम 71(क) के तहत अब बाजार मूल्य के स्थान पर रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना विकास उपकर, एसएमईटी तथा अन्य देय करों के समतुल्य राशि का प्रावधान किया गया है।
पंचायतों और नगरीय निकायों को मिलेगा अधिक लाभ
संशोधित व्यवस्था के अनुसार गौण खनिजों से प्राप्त राजस्व का वितरण अब केवल नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला पंचायतों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
निष्क्रिय खदानों के संचालन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने बंद एवं निष्क्रिय खदानों के लिए निर्धारित अनिवार्य भाटक (डेड रेंट) की दरों में लगभग 30 वर्षों बाद वृद्धि की है। इस कदम का उद्देश्य लंबे समय से बंद पड़ी खदानों को पुनः अधिग्रहित कर उनकी दोबारा नीलामी अथवा नई स्वीकृति के माध्यम से संचालन शुरू कराना है, जिससे खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग और राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।




















