गौरतलब है कि पिछली बार कांकेर में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को लेकर हुए आंदोलन में बड़ी संख्या में समाज के लोग जुटे थे। आंदोलन में उमड़ी भारी भीड़ ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था। अब करीब एक बार फिर 27 प्रतिशत आरक्षण और पिछड़ा वर्ग के अधिकारों का मुद्दा गरमाने लगा है, ऐसे में 19 अगस्त को होने वाले आंदोलन को लेकर समाज की सक्रियता बढ़ गई है।

15 साल से लंबित अधिकारों को लेकर संघर्ष
टिकेश्वरी सिन्हा ने कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज पिछले करीब 15 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। 27 प्रतिशत आरक्षण की बहाली, पंचायतों में पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अधिकार और बस्तर के विकास से जुड़े मुद्दे समाज की प्रमुख मांगों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल अथवा व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि समाज के संवैधानिक अधिकारों के लिए है।
उन्होंने कहा, “यह लड़ाई किसी दल के विरोध में नहीं है। यह लड़ाई समाज के संवैधानिक अधिकार की है। हमें अपने अधिकार के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।”
‘जो पिछड़ों की बात करेगा, वही छत्तीसगढ़ में राज करेगा’
सिन्हा ने समाज के गठन के समय दिए गए नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन की स्थापना के समय से ही समाज की स्पष्ट सोच रही है। “जो पिछड़ों की बात करेगा… वही छत्तीसगढ़ में राज करेगा” का नारा आज भी समाज की आवाज बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर आगे आना होगा।

पहले एकत्रीकरण, फिर कलेक्ट्रेट तक रैली
19 अगस्त को सुबह 11 बजे पुराने कम्युनिटी हॉल, कांकेर में समाज के लोगों का एकत्रीकरण होगा। इसके बाद समाजजन रैली के रूप में कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचेंगे और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे। आयोजकों ने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से संचालित करने की बात कही है।
महिलाओं और युवाओं से भी बड़ी भागीदारी की अपील
समाज ने आंदोलन में माताओं, बहनों, युवाओं और सभी पदाधिकारियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। समाज की ओर से कहा गया है कि यह किसी दल विशेष का कार्यक्रम नहीं है, इसलिए सभी लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाजहित के मुद्दे पर एकजुट हों।
टिकेश्वरी सिन्हा ने कहा, “हम शांति से आएंगे, अधिकार लेकर जाएंगे। हमें भवन नहीं, अधिकार चाहिए।”
19 अगस्त का आंदोलन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब पिछड़ा वर्ग के आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पिछली बार आंदोलन में उमड़ी भीड़ के बाद अब समाज की नजरें 19 अगस्त को होने वाले प्रदर्शन पर टिकी हैं। प्रशासन के सामने समाज की मांगों और आंदोलन में जुटने वाली भीड़ को लेकर यह आयोजन एक बार फिर महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक संदेश देने वाला माना जा रहा है।






