नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026। पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालातों के बीच भारत सरकार ने देश में ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचालन और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर व्यापक और सख्त इंतजाम किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा संकट के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
सरकार के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न परिस्थितियों के बावजूद देशभर में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की है, जबकि घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाया गया है।
एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी सरकार पूरी तरह सक्रिय है। एक दिन में करीब 51 लाख घरेलू सिलेंडर वितरित किए गए हैं, वहीं 5 किलो के छोटे एफटीएल सिलेंडरों की मांग तेजी से बढ़ी है। 23 मार्च से अब तक 5.7 लाख ऐसे सिलेंडर वितरित किए जा चुके हैं। खास बात यह है कि ये छोटे सिलेंडर अब किसी भी वैध पहचान पत्र पर बिना पते के प्रमाण के उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी पर नकेल कसने के लिए देशभर में सख्त कार्रवाई जारी है। बीते दिन 3700 से अधिक छापेमारी की गई, 1000 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और 27 वितरकों को निलंबित किया गया।
प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। मार्च 2026 से अब तक 3.5 लाख से अधिक नए पीएनजी कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की जा चुकी है, जबकि 3.8 लाख से अधिक लोगों ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। उर्वरक संयंत्रों को गैस आपूर्ति बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है, जो 6 अप्रैल से बढ़ाकर औसत खपत के लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंचाई जाएगी।
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ईंधन आपूर्ति की निगरानी करें, जमाखोरी और फर्जी खबरों पर सख्ती से कार्रवाई करें तथा नियमित प्रेस ब्रीफिंग के जरिए जनता को सही जानकारी उपलब्ध कराएं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्यों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोका जा सके।
समुद्री क्षेत्र में भी भारत पूरी तरह सतर्क है। एलपीजी पोत ‘ग्रीन सानवी’ ने 46,650 मीट्रिक टन कार्गो के साथ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लिया है। वर्तमान में पश्चिमी फारस की खाड़ी में 17 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर 460 भारतीय नाविक सवार हैं। अब तक 1,320 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है। डीजी शिपिंग का 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम लगातार सहायता प्रदान कर रहा है।
विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
ईरान से भारतीय मछुआरों की वापसी की प्रक्रिया जारी है, जबकि 28 फरवरी से अब तक लगभग 6.75 लाख यात्री विभिन्न खाड़ी देशों से भारत लौट चुके हैं। अबू धाबी में हुए हमले में घायल पांच भारतीयों में से चार को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है और एक का इलाज जारी है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराहट में ईंधन की खरीदारी से बचें। साथ ही ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए वैकल्पिक ईंधनों जैसे पीएनजी, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकटॉप के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है।
समग्र रूप से, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने देश के भीतर ईंधन आपूर्ति को स्थिर रखने और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत और समन्वित रणनीति अपनाई है, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी हुई है।




















