नई दिल्ली/रायपुर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के दो अलग-अलग राज्यों में हुई दर्दनाक घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने इन घटनाओं को प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा मामला माना है।
रायपुर में सेप्टिक टैंक हादसे पर दो सप्ताह में रिपोर्ट
आयोग ने छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में 17 मार्च 2026 को एक निजी अस्पताल में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से तीन सफाई कर्मचारियों की मौत की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन और निजी ठेकेदार की ओर से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इस मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट और रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने रिपोर्ट में अब तक की जांच की स्थिति, जिम्मेदार पक्षों पर की गई कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों की जानकारी भी मांगी है।
दिल्ली के पालम अग्निकांड पर भी कार्रवाई
इसी क्रम में आयोग ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में 18 मार्च 2026 को चार मंजिला इमारत में लगी आग में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत और तीन अन्य के घायल होने की घटना का भी स्वतः संज्ञान लिया है। मृतकों में तीन बच्चे और 70 वर्षीय महिला शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आग शॉर्ट सर्किट के कारण भूतल की एक दुकान से शुरू होकर तेजी से ऊपर की आवासीय मंजिलों तक फैल गई। इस दौरान दमकल कर्मियों की हाइड्रोलिक क्रेन में तकनीकी खराबी आने से बचाव अभियान में देरी हुई। स्थानीय लोगों ने खिड़कियां और दीवारें तोड़कर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की, जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए।
आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही पीड़ितों एवं घायलों को दिए गए मुआवजे की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा गया है।
मानवाधिकार सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
एनएचआरसी ने दोनों मामलों में स्पष्ट किया है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह राज्य और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी तथा नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बनता है।
आयोग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




















