
कांग्रेस का हमला: “अफीम खेती के पीछे सत्ता संरक्षण”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में सामने आए अफीम खेती के मामलों में भाजपा के प्रभावशाली नेताओं के संबंध सामने आ रहे हैं। उन्होंने दुर्ग जिले में कथित तौर पर अफीम खेती से जुड़े एक व्यक्ति के भाजपा नेताओं के साथ संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि वह सिर्फ एक “छोटा मोहरा” हो सकता है और असली संरक्षण सत्ता स्तर पर मिला हुआ है।
बैज का कहना है कि बलरामपुर सहित अन्य क्षेत्रों में जिन जमीनों पर अफीम की खेती पकड़ी गई, वहाँ सरकारी रिकॉर्ड में अन्य फसलें दर्ज होना प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रदेश में अफीम खेती की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, क्योंकि बिना सरकारी संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध नशे का कारोबार संभव नहीं है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में लगातार अलग-अलग स्थानों से सामने आ रहे मामलों से यह संकेत मिलता है कि नशे का नेटवर्क संगठित रूप से संचालित हो रहा है और सरकार इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही है।

सरकार का जवाब: सख्ती, सर्वे और कार्रवाई
इन आरोपों और हालिया खुलासों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अवैध मादक पदार्थों की खेती पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कहीं भी अफीम या अन्य नशीली फसलों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
राज्य स्तर से सभी जिला कलेक्टरों को संवेदनशील क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। तय समयसीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी, जिसमें स्पष्ट उल्लेख होगा कि जिले में अवैध अफीम खेती की स्थिति क्या है।
हाल ही में दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम खेती के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में पौधों को नष्ट करने की कार्रवाई की गई। इसी तरह बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में संयुक्त टीम ने करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर की जा रही खेती का भंडाफोड़ कर भारी मात्रा में पौधे जब्त किए और आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
सियासत बनाम कानून व्यवस्था: बड़ा सवाल
अफीम खेती के मुद्दे ने अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीतिक विमर्श का रूप ले लिया है। विपक्ष इसे सत्ता संरक्षण से जोड़कर सरकार को घेरने में जुटा है, जबकि सरकार सख्त कार्रवाई और “जीरो टॉलरेंस” नीति का हवाला देकर अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही है।
आने वाले दिनों में सर्वे रिपोर्ट और जांच की दिशा तय करेगी कि यह मामला सिर्फ आपराधिक कार्रवाई तक सीमित रहता है या प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरता है।




















