
हिमांशी वर्तमान में पीएम श्री सेजेस/स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाड़ा में कक्षा 9वीं की छात्रा हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा, मेहनत और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। कक्षा 5वीं में 90 प्रतिशत और कक्षा 8वीं में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने पहले ही अपनी मेधा साबित कर दी थी। अब इसरो के यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम में चयन ने उनकी सफलता में नया अध्याय जोड़ दिया है।

राज्य में तीसरा स्थान, जिले का नाम रोशन
हिमांशी ने इसरो के चयन में पूरे राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त कर बालोद जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि के बाद जिलेभर में खुशी का माहौल है। परिवार, शिक्षक, प्रशासन और ग्रामीणों ने इसे जिले की बेटियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया है।

हिमांशी के पिता अभय कुमार साहू व्याख्याता हैं, जबकि माता सहिता साहू ने बेटी की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि मेहनत और अनुशासन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। हिमांशी का सपना भविष्य में सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना है।

कलेक्टर ने किया सम्मानित
हिमांशी की इस बड़ी सफलता पर जिला प्रशासन ने भी सम्मान किया। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में हिमांशी को प्रशस्ति पत्र, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हिमांशी की सफलता पूरे बालोद जिले के लिए गौरव का विषय है और यह अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करेगी।
इस दौरान जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, अजय किशोर लकरा, नूतन कंवर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने हिमांशी के माता-पिता को भी सम्मानित कर बधाई दी।

स्कूल में सम्मान समारोह, शिक्षकों ने दी शुभकामनाएं
विद्यालय में भी हिमांशी के सम्मान में विशेष समारोह आयोजित किया गया। प्राचार्य विनोदिनी यादव ने कहा कि यह उपलब्धि हिमांशी की मेहनत, माता-पिता के मार्गदर्शन और शिक्षकों के सहयोग का परिणाम है। स्कूल स्टाफ ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में बड़गांव स्कूल की शिक्षिकाएं भी शामिल हुईं और हिमांशी को सम्मानित किया।
क्या है इसरो का ‘युविका’ कार्यक्रम?
इसरो का युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका) स्कूली विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई विशेष पहल है। यह कार्यक्रम “Catch Them Young” अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य कम उम्र में ही बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है।
इसके तहत छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान, स्पेस टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, गणित और विज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को इसरो के विभिन्न केंद्रों में व्याख्यान, प्रयोगात्मक सत्र और प्रशिक्षण का अवसर मिलता है। इस दो सप्ताह के आवासीय कार्यक्रम का पूरा खर्च इसरो उठाता है।

बेटियों के लिए प्रेरणा बनी हिमांशी
ग्राम सिवनी से निकलकर इसरो तक पहुंची हिमांशी साहू ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी शहर या संसाधन की मोहताज नहीं होती। मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन मिले तो गांव की बेटी भी अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया तक पहुंच सकती है। हिमांशी अब बालोद ही नहीं, पूरे क्षेत्र की छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
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संतोष साहू




















